संध्या भाभी ने अपनी चुत मुझे इनाम में दी

नमस्कार दोस्तों आज में जो कहानी आपको सुनाने जा रहा हु वो बहुत रोमांटिक है और मजेदार भी दोस्तों में बीकानेर सिटी में रहता हूँ और इलेक्ट्रिक विभाग में जॉब करता हूँ। दोस्तों बात उस समय की जब मैं विभाग के एक उपभोक्ता का इलेक्ट्रिक का मीटर फिटिंग करने गया था। मीटर का कनेक्शन किसी संध्या मिश्रा औरत के नाम से जारी किया गया था। मैं मीटर ले कर अपनी बाइक से संध्याजी के घर पहुँचा तो संध्याजी घर के बाहर ही सीढ़ियों पर बैठी थीं। मुझे देखते ही संध्याजी खड़ी हो गईं और मैं संध्याजी से बोला की आपका इलेक्ट्रिक कनेक्शन जारी किया गया है ओर मैं आपके घर मीटर फिटिंग करने आया हूँ। और दोस्तों में आप संध्या जी के फिगर की जानकारी देना तो भूल गया तो में उनका फिगर कुछ इस तरह था। मेरे अनुमान से उनकी उम्र 25 -27 साल की होगी.. संध्या के बॉडी का कलर गोरा था और उनकी त्वचा एकदम साफ थी और बूब्स तो संध्या के बड़े ही मस्त थे।

संध्या के जिस्म का साइज़ शायद (बूब्स 34) (कमर 30) (गांड 36) के आस-पास था।जिस समय मैं संध्या के घर गया था उस समय संध्या ने ब्लाउज तो बिल्कुल खुले गले का पहना हुआ था… जिसके कारण संध्या के बूब्स मुझे साफ़ दिखाई दे रहे थे और उन बूब्स की घाटी की गहराई तो देखने लायक थी। कुल मिला कर भगवान ने संध्या को बड़ी फ़ुर्सत से बनाया था। शायद संध्या ने मुझे देख लिया था कि मेरी नज़र उसके बूब्स पर थी। फिर संध्या मुझे अंदर मीटर फिटिंग करने के लिए बोलीं। मैं जब संध्या का मीटर फिट रहा था तो मेरी नज़र बार-बार संध्या के बूब्स पर ही जा रही थी। मेरी इस हरकत पर संध्या मुस्कुरा रही थीं। थोड़ी देर में मैंने संध्या का मीटर लगा दिया। उसके बाद संध्या ने मुझे अन्दर बैठने के लिए बोला। मैं जाकर एक सोफे पर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद संध्या चाय लेकर आईं और झुक कर कप में चाय डालने लगीं। इस कारण मुझे उनके बड़े-बड़े बूब्स के पुर्ण दर्शन हो रहे थे। संध्या के मस्त बूब्स को देखते ही मेरा लंड तो पैन्ट के अन्दर ही तंबू हो गया था और संध्या जी ने भी इसे महसूस कर लिया था। फिर संध्या मेरे पास आकर बैठ गईं और मुझे चाय देते हुए बोलीं- आपको मेरे घर पर नया मीटर लगाने का इनाम तो देना ही पड़ेगा। ऐसा कहते हुए संध्या ने मेरा लंड पैन्ट के ऊपर से ही पकड़ लिया और उसे सहलाने लगीं। मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि संध्या ऐसा करेंगी। फिर संध्या की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं तो संध्या के ऊपर टूट पड़ा। मैं अपने होंठों से संध्या के होंठों का रसपान करने लगा। क्या मुलायम होंठ थे मुझे संध्या के होंठों को चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर धीरे-धीरे मेरे हाथ संध्या के चूचों पर रेंगने लगे ओर उन्हें ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा। थोड़ी देर में मैंने उनके चूचों को संध्या के कपड़ों से आज़ाद कर दिया। संध्या जी ने लाल रंग की ब्रा पहन रखी थी.. जिसमें से संध्या के गोरे-गोरे बूब्स चमक रहे थे। मैंने उसको भी निकाल फेंका और संध्या के एक मम्मे को पकड़ कर पागलों की तरह चूसने लगा। मैं एक को चूसता और दूसरे को मसलता.. इस तरह करते हुए मुझे 15 मिनट के ऊपर हो गए थे और संध्या जी अपनी मस्ती में अपने चूचों को मसलवाने का मज़ा ले रही थीं और बड़बड़ा रही थीं, ‘ओर मसलो.. और ज़ोर-ज़ोर से दबाओ इन्हें… सारा दूध निकाल दो इनका…’ मैंने देर ना करते हुए हम दोनों के बाकी के कपड़े भी उतार दिए।

अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। फिर संध्या मेरा लंड अपने मुँह में लेकर उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं। उस समय मेरे पूरे शरीर में हाई-वोल्टेज का करंट दौड़ रहा था। सच में संध्या लंड चूसने में एक्सपीरियंस औरत थीं। उस समय मेरे मुँह से मज़े में अजीब-अजीब सी सिसकारियाँ निकल रही थीं। थोड़ी देर में ही मेरा जिस्म अकड़ने लगा और संध्या जी मेरा पूरा पानी गटक गईं। कुछ देर के लिए मुझे ऐसा लगा की में मिया खलीफा के साथ सेक्स कर रहा हूँ।  अब बारी मेरी थी.. मैंने सांध्य को बिस्तर पर लिटाया और संध्या के जिस्म को चूमने लगा। थोड़ी देर बाद जैसे ही मैंने संध्या की चूत के दाने को अपनी ज़ुबान से चाटा तो संध्या ने एकदम से अपनी गाण्ड मटकाने लगीं।

फिर तो मैं संध्या की चूत को रस ले-ले कर चूस और चाट रहा था। अब तो मैं एक तरह से अपनी ज़ुबान से में संध्या की चूत चोद रहा था। संध्या जी अपनी गाण्ड उठा -उठा कर अपनी चूत चटवा रही थीं। फिर संध्या बोलीं- अब देर ना करो और अपना लंड मेरी चूत में डाल दो.. क्योंकि अब मुझसे सहन नहीं हो रहा है। मैंने संध्या की टाँगों को अपने कन्धों पर रखा और लंड के टोपे को चूत के मुँह पर टिका कर एक ज़ोर का धक्का लगाया और मेरा 6.5 ” का लंड संध्या जी की चूत की गहराइयों में ‘गच्छ’ की आवाज़ के साथ उतरता चला गया। जैसे ही मेरा लंड संध्या की चूत में गया.. संध्या ने अपने पैरों का घेरा मेरी कमर पर बना लिया।

मेरा लंड धक्के लगातार उनकी चूत को चोद रहा था। चूत गीली होने की वजह से लंड चूत से ‘फ़चक.. फ़चक..’ की आवाजें आ रही थीं। संध्या जी अपनी पूरी मस्ती से चुदवा रही थीं और मेरे लंड के हर धक्के का जवाब संध्या अपनी गाण्ड उचका कर दे रही थीं। फिर करीब 20-30 धक्कों के बाद संध्या का जिस्म अकड़ने लगा और चूत से फॅक-फॅक की आवाजें आने लगीं। थोड़ी देर बाद मेरे लंड ने भी अपना लावा संध्या की चूत में उड़ेल दिया। फिर हम दोनों के जिस्म थोड़ी देर के लिए किसी चुंबक की तरह चिपक गए। फिर हमने अपने-अपने कपड़े पहन लिए। और में चला गया वापिस थैंक्स दोस्तों

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