विनीता भाभी ने कार में मेरे लण्ड को चूसा

हेलो दोस्तों मेरा नाम ऋषि है में राजस्थान कोटा का रहने वाला हु में पेशे से एड ड्राइवर हूँ में मुंबई में मेरे एक बॉस है वह में काम करता हूँ। ये बात कुछ 2 साल पहले की हैं. मेरे बॉस के फैक्ट्री के सामने ही उनका एक टॉउनशिप था. जहा उनका एक बंगलो था वहा बॉस अपनी फॅमिली के साथ रहते थे. बॉस की सेक्सी बीवी थी। उनका नाम विनीता था में मॉर्निंग में उनको कम्पनी और इवनिंग में कम्पनी से घर लाता था उस टाइम सर्दिओ का मौसम था. मैं रोज के हिसाब से बॉस को पिकअप और ड्राप कर रहा था. एक दिन मैं जब उनके बंगलो पहुंचा और गंटी बजाई तो बॉस ने आने में कुछ समय लगाया.

बॉस नहीं आये लेकिन बंगलो के अन्दर से एक सुरीली अवाई आई की आते हैं. जैसे ही प्रवेशमार्ग खुला मेरे सामने एक 30 साल के करीब की सेक्सी भाभी खड़ी थी. प्लेन रेड साड़ी में वो बड़ी सेक्सी लग रही थी. मैं 2 मिनिट्स भाभी को देखता ही रह गया. भाभी ने भी मुझे घूरते हुए नोटिस किया. भाभी ने मुझे कहा, रुको बॉस आते हैं कुछ देर में. मैंने कहा ठीक हैं मैं कार में वेट करता हूँ. तो भाभी ने कहा, अन्दर जाओ बहार ठंडी हैं. मैं भाभी को देखने लगा उनकी नजर मेरे लण्ड की तरफ थी जैसे की भाभी उसे साइज़ अप कर रही हो. मैं सोफे पर बैठा और वो मेरे लिए पानी ले के आई. मैं पानी पी रहा था और भाभी मुझे ही देख रही थी. 5 मिनिट में बॉस ऊपर से सीडियां उतरते हुए निचे आये. भाभी को देख के बोले, विनीता क्या तुम बाजार हो आई कल?

विनीता भाभी ने थोड़े दबे आवाज में कहा, जी नहीं टाउनशिप के बाहर एक ही रिक्शेवाला होता हैं और वो कल नहीं आया था. ओके, क्या मैं कार भेजूं ऑफिस जाने के बाद. विनीता भाभी जी हाँ, वो सही रहेगा. बॉस ने मेरी और देख के कहा, देखो मनोज भाई आप मुझे ड्राप कर के मेमसाब को बाजार ले जाना जरा. ठीक हैं बॉस. बॉस को फेक्ट्री में ड्राप कर के मैं आधे घंटे में वापस घर आया. घर की घंटी 5 बार बजाई लेकिन कोई जवाब नहीं आया. मैंने सोचा की विनीता भाभी कही चली गयी होंगी. यह सोच के मैं वापस कार की तरफ जा ही रहा था की दरवाजा खुला. सामने विनीता भाभी खड़ी थी जो अभी स्नानघर से नाहा के आई थी. उसके शरीर पर एक हलके रंग की साडी थी जिसके अन्दर की ब्लू ब्रा साफ़ दिख रही थी. उसके कपड़ो में नमी थी इसलिए अन्दर के अंतरवस्त्र मैं देख सकता था. विनीता भाभी ने मुझे कहा, अन्दर आओ.

विनीता भाभी आगे बढ़ी और मैं उसके पीछे. विनीता भाभी की गांड के ऊपर भी ब्लू पट्टी दिख रही थी पेंटी की. मैं उसे देखता ही रहा. मेरे लण्ड में जान गई थी और मैं इस मुंबई वाली आइटम को चखने के लिए बेताब था. विनीता भाभी ने मुझे सोफे पर बैठने के लिए कहा और विनीता भाभी स्नानघर की और चली गई. 10 मिनिट में जब विनीता भाभी बहार आई तो उसने अपना चहरा मेकअप में लपेड़ा हुआ था. आँखों पर ब्लेक फ्रेम के काले चश्मे थे और सोफे के पास की मेज से पर्स लेते हुए विनीता भाभी बोली, चलो चलते हैं. विनीता भाभी फिर मेरे आगे थी और मैं उनकी सेक्सी गांड को देख रहा था. कुल्हें मटकाते हुए वो चल रही थी और मेरा लोडा खड़ा हो रहा था. विनीता भाभी ने मुड़ के देखा और मुझे अपनी गांड देखते हुए पाया. विनीता भाभी हंसी और बोली, जल्दी चलो बाबा.

मैं भी अपने होंठो में हँसता हुआ बहार निकला. विनीता भाभी ने दरवाजे पर ताला लगाया और कार की और बढ़ी. मुझे लगा था की विनीता भाभी पीछे की सिट में बैठेंगी लेकिन उसने तो आगे का दरवाजा खोला. वो सिट पर बैठी और मैंने कार स्टार्ट की. बाजार जाते जाते विनीता भाभी ने मुझे अपने बारे में बताया और मेरी भी इतिहास खुलवा दिया. उसने यह भी पूछा की मैं अभी कुंवारा था या शादीसुदा. बाजार से कुछ दिन की सब्जिया लेने के बाद वो वापस आई. मैं कार के पास खड़ा हुआ फ़ोन में गेम खेल रहा था. विनीता भाभी के आते ही मैंने कार का पीछे का गेट खोला. विनीता भाभी ने सारा सामान रखा और फिर आगे का गेट खोल के बैठ गई. कार अपनी काम स्पीड में चल रही थी तभी विनीता भाभी ने मुझे कहा, क्या तुम गाड़ी चलाना सिखाते भी हो? तो मेने कहा किसे सीखना हैं? विनीता भाभी मैं ही सोच रही थी सिखने के लिए. जी हां, आप को मैं सिखा सकता हूँ मेडम.

विनीता भाभी हंसी और चुदासी नजरों से मुझे ऊपर से निचे तक देखा. विनीता भाभी के मन में भी कीड़ा था जो मैं उसकी आँखे देख के बता सकता था. कार घर से अभी कुछ दूर थी की विनीता भाभी बोली, क्या आज से ही स्टार्ट कर सकते हैं हम कार सीखना? क्यूँ नहीं, वैसे भी आज मेरा कोई कस्टमर नहीं है अभी यहाँ से जाने के बाद. हम लोग घर पहुंचे और विनीता भाभी ने सब्जी के ठेले घर में रख दिए. फिर मुझे पानी देने के बाद विनीता भाभी मेरी और देखने लगी. विनीता भाभी शायद बहार जाने के लिए बेताब थी. मैंने कहा, चले मेडम? हाँ चलो. विनीता भाभी कार में बैठी और मैंने कार को क्रिकेट मैदान की और दौड़ा दिया. दोपहर का टाइम हो चला था इसलिए मैदान पूरा खाली था. एक कौने में सिर्फ बंजारों के कुछ तम्बू थे जिसके बहार तिन औरतें खाना पका रही थी.

कार को साइड में लगा के मैंने विनीता भाभी को क्लच, एक्सलेरेटर, ब्रेक, वगेरह का कुछ ज्ञान दिया तो उसने कहा की उसने आलरेडी क्लास किये थे ड्राइविंग के लिए लेकिन प्रेक्टिस नहीं हो पाई इसलिए वो कोंफिडेंट नहीं हैं चलाने के लिए. मैंने कहा, ये तो अच्छा हैं की आप को यह सब पता हैं, कोंफीडेंट आज हो जाएगा. विनीता भाभी ने कार स्टार्ट की और मैं भाभी के बगल में बैठा. जैसे ही उसने फर्स्ट गियर में कार को उड़ाया मैं जान गया की वो क्लच जल्दी छोड़ देती हैं. कार एक झटका खा के बंध हो गई. मैंने भाभी से कहा की आराम से आप क्लच छोड़ें. भाभी ने फिर से ट्राय किया लेकिन वो वही झटके से कार को बंध करने में फिर से सफल रही. मैंने कहा, आइये मैं आप को दिखाता हूँ.

इतना कह के मैंने गियर के डंडे की उस साइड पर एक पाँव रखा और क्लच को दबा के विनीता भाभी को बताया की कैसे छोड़ना हैं. भाभी ने कहा की आप पाँव रहने दो यही, मैं कार स्टार्ट करती हूँ. उसने कार स्टार्ट की और पहले गियर में मैंने डाली. उसने एक्स्लेरेटर दबाया और मैं उसके हिसाब से क्लच छोड़ता गया. कार रुकी नहीं इसलिए भाभी खुश हो गई. और इस खिंचातानी में पता नहीं कब उसका एक हाथ मेरी जांघ पर गया. मुझे भी पहले अहसास नहीं हुआ लेकिन जब नजर पड़ी तो मुझे अच्छा लगने लगा. विनीता कार सिखने की नौटंकी करते हुए मेरी जांघ के ऊपर हाथ को सहला रही थी. मेरा तो लंड खड़ा हो गया उसके ऐसा करने से. और विनीता ने हिम्मत कर के अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे लंड पर दस्तक दे दी. मेरा टाईट लंड छूते ही उसका कडापन उसे भी मदहोश कर गया होगा. उसने मेरी और देखा और मैं हंस पड़ा.

विनीता भाभी ने कार को साइड में ब्रेक लगाईं और मेरी जांघ के ऊपर हाथ फेरने लगी. मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और मैंने विनीता के स्तन पर अपना हाथ रख दिया. विनीता भाभी ने कार की सभी खिड़की से बहार देखा. इर्दगिर्द में कोई नहीं था जहां तक नजर जाती थी. विनीता ने अब मेरी पेंट की जिप खोल दी और लौड़े को बहार निकाला. खड़ा लंड देख के उसकी आँखों में चमक गई और वो मेरे लौड़े को अपने हाथ में पकड के हिलाने लगी. मेरे तो होश उड़े हुए थे. मैं जोर जोर से विनीता भाभी के स्तन को दबाता जा रहा था. विनीता भाभी मेरे लंड को बड़े ही प्यार से सहलाती जा रही थी. और उसके बाद विनीता ने जो किया वो तो मैंने सोचा ही नहीं था. भाभी ने अपना सर निचे किया और मेरे लौड़े को अपने मुहं में भर लिया. वाऊ, विनीता के मुहं की चिकनाहट बड़ी ही सेक्सी थी जिस से मुझे दुगुना मजा आने लगा.

विनीता भाभी अपने मुहं को आगे पीछे करने लगी और जोर जोर से लौड़े को मुहं में आगे पीछे करती रही. मैंने अपना हाथ विनीता भाभी के माथे पर रखा और उसे लौड़े पर दबा दिया. और निचे से मैं अपनी गांड उठा के विनीता भाभी के मुहं में लंड को धकेलता रहा. 5 मिनिट ऐसे ही लंड चूसने के बाद विनीता भाभी के मुहं में ही मैंने अपने वीर्य का फव्वारा छोड़ दिया. विनीता भाभी आराम से वीर्य पी गई और उसने लौड़े को चाट के साफ़ कर दिया. भाभी ने मुहं से लौड़े को सब तरफ से साफ़ किया और उठ गई. विनीता भाभी ने कहा, चलो घर चलते हैं, सब कुछ यहाँ नहीं कर सकते…! कार चलाते चलाते मैं विनीता भाभी की चूत के सपने देख रहा था !

Leave a Reply