रेखा मेडम और तन्वी डॉ. को बाथरूम में चोदा

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम विनोद है में राजस्थान में रहता हु। दोस्तों रिसेंटली मेने एक लड़की को चोदा था जिसका नाम रिया था। पहली बार रिया को चोदने के बाद मुझे लगने लगा था कि मैं अपने इस हुनर से अकेली और तनहा रहने वाली भाभियों को खुश करके उनका और अपना भला कर सकता हूँ। वैसे कुछ लोग कहेंगे कि यह काम बहुत गन्दा और नीच है पर मैं सोचता हूँ कि जिससे मुझे और दूसरों को खुशी मिलती है वो काम बुरा हो ही नहीं सकता है। रिया को चोदने के बाद मैं अपने घर पहुँचा ही था कि मेरे फ़ोन पर रंजन का मेसेज आया। दोस्तों रंजन की चुदाई मेने पहले की थी उसके बाद रंजन मेरी बेस्ट फ्रेंड बन गई और अब मेरी मैनेजर है लिखे (दलाल) जो मेरे लिए लड़किया ढूंढती है। जिसमें लिखा था- जियो मेरे शेर… मुझे पता था कि तुम रिया की चुत और गांड का बैंड बजा दोगे। अच्छा मैंने तुम्हारे कॉलेज के लिए अपनी सहेली से बात कर ली है, उनका नाम प्रोफेसर रेखा शर्मा है, आज तुम रेखा से मिलने चले जाना, बाकी सब रेखा तुम्हें बता देंगी।

उसके बाद मैं नहा धोकर रेखा मेम से मिलने के लिए कॉलेज के लिए निकला जहाँ मुझे प्रोफेसर रेखा शर्मा से मिलना था। रेखा राजस्थान के बहुत बड़े कॉलेज में साइंस की टीचर है। थोड़ी देर इधर उधर पूछने के बाद मैं रेखा के केबिन में पहुँचा तो देखा वह एक 27-28 साल की लड़की सामने कुर्सी पर बैठी थी। उसका शरीर एक औसत लड़की की तरह था, न ज्यादा मोटा न ज्यादा पतला। उसके होंठ बहुत खूबसूरत थे और छातियों का आकार 34 का होगा। मैंने उनसे पूछा- मुझे प्रोफेसर रेखा से मिलना है, मुझे रंजन मैडम ने भेजा है। तो उसने पलटकर कहा- मैं ही रेखा हूँ, लाओ अपने डॉक्यूमेंट दिखाओ। मैंने चुपचाप अपने सारे डॉक्यूमेंट रेखा के सामने रख दिए पर रेखा मुझे ही देख रही थी। मैं रेखा की नज़रों से बचने के लिए इधर उधर देखने लगा तो रेखा ने कहा- तुम्हारा काम हो जायेगा लेकिन इसके बदले तुम्हें मेरा एक काम करना पड़ेगा।

मैंने रेखा के फेस की स्माइल को देखकर समझ गया था कि रेखा क्या चाहती है। तो मैंने कहा- आप बता दीजिये कहाँ आना है, मैं पहुँच जाऊँगा। तो रेखा ने कहा- कुछ देर बाहर रुको करो मैं तुम्हारा एडमिशन फॉर्म और फीस जमा करा कर आती हूँ। मैं जैसे ही अड्मिशन के पैसे रेखा को देने लगा तो रेखा ने कहा- इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं दे दूँगी। तुम बस रेडी रहो अपने इम्तेहान के लिए। मैं बाहर जाकर गार्डन में बैठ गया। लगभग 1 घंटे बाद रेखा अपने पर्स लेकर मेरे पास आई और मुझे मेरे एडमिशन फॉर्म की रिसिप्ट देकर मुझे अपने पीछे आने के लिए कहा। मैं भी बिना कुछ सोचे समझे रेखा के पीछे पीछे चल दिया। रेखा आगे अपनी गाड़ी के पास जाकर रुक गई। मैं रेखा की गाड़ी को देखता रह गया। रेखा के पास ऑडी कार थी।

फिर मैं रेखा के कार में फ्रंट वाली सीट पर बैठ गया। फिर रेखा मुझे 2 किलोमीटर दूर एक के एक मैटरनिटी हॉस्पिटल लेकर गई। वहाँ रेखा ने मुझे तन्वी से मिलाया तन्वी उस हॉस्पिटल की मालकिन थी। हम तीनों तन्वी के केबिन में बातें कर रहे थे। फिर रेखा ने मुझे कहा की विनोद तुम्हें यहाँ लाने का एक ही कारण यह है कि तन्वी दीदी यह मैटरनिटी हॉस्पिटल चलाती हैं। यहाँ पर उन लोगों का इलाज होता है जिन्हें कोई संतान नहीं होती है। तन्वी- हम चाहते हैं कि चुदाई के दौरान जब तुम्हारा वीर्य निकले वो खराब न जाये। हम उसे अपने पास स्टोर करके रखेंगे। जिससे वो किसी की खाली कोख को भर सके। पर इससे तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है, हम तुम्हें हॉस्पिटल की तरफ से एक सर्टिफिकेट जारी करेंगे जिसमें

यह लिखा होगा कि हम तुम्हारा वीर्य दान के रूप में ले रहे हैं। तो मैंने कहा- अगर मैं किसी के लिए ख़ुशी का कारण बन सकता हूँ तो मैं इसके लिए तैयार हूँ। तन्वी ने मेरे हाथ में एक डब्बी थमाकर कहा- इसमें अपना वीर्य भरकर लाओ, मैं उसे जांच के लिये भेज दूंगी। तो मैंने कहा- इसमें तो 20-25 मिनट लगेंगे। तभी रेखा ने कहा- अच्छा जी? तो आओ मेरे साथ अभी देख लेती हूँ कि कितना दम है तुम्हारे रॉकेट में। और मेरा हाथ पकड़कर तन्वी के बाथरूम में ले गई। वहाँ जाकर रेखा ने मेरी पैंट खोलकर नीचे गिरा दी तभी मेरा लण्ड रॉकेट की तरह सीधा खड़ा हो गया। रेखा ने मुस्कुराते कहा- तुम्हारा रॉकेट बहुत बड़ा है, अब देखती हूँ कि कितनी देर टिकता है।

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रेखा मेरे लण्ड को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी और घुटनों के बल बैठकर मेरी लिंगमुंड को अपने मुँह में ले लिया। धीरे धीरे रेखा ने मेरा पूरा लण्ड उसके मुँह में ले लिया। मैंने भी अपनी रफ़्तार पकड़ ली और रेखा के सर को पीछे से पकड़ के उसके मुख को चोदने लगा। रेखा का मुँह लार से भर गया लेकिन अब तक मेरे रॉकेट मैं बहुत दम था।  करीब 18 मिनट हो चुके थे लेकिन मेरे लण्ड ने हथियार नहीं डाले। इतने में तन्वी भी बाथरूम में आ गई और कहने लगी- रेखा, क्या हुआ? अभी नहीं निकला क्या? तो रेखा कहने लगी- नहीं, इसमें बहुत दम है, निकल ही नहीं रहा। फिर मैंने तन्वी को भी नीचे बिठाकर अपना लण्ड तन्वी के मुँह में दे दिया।

तन्वी बहुत तेजी से मेरे लण्ड को चूस रही थी। 10 मिनट बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और रेखा का जींस पेण्ट समेत उसकी पैंटी को भी निचे की तरफ किया और रेखा को दीवार की तरफ मुँह करके खड़ा कर दिया। मैंने अपने पॉकिट से एक कंडोम निकाल कर तन्वी को दिया और तन्वी ने बिना देर किये मेरे लण्ड पे कंडोम चढ़ा दिया और कहा- रंजन ने बताया था कि जब तुमने उसे पहली बार चोदा था तो कंडोम फट गया था, तो आज फिर यह कारनामा करके दिखाओ। फिर मैंने अपना लण्ड रेखा की चूत के मुँह पे लगाकर कहा- कंडोम का तो पता नहीं लेकिन रेखा मैडम की चूत जरूर फ़ाड़ दूँगा। और एक ही झटके में अपना आधा लण्ड रेखा की चूत में डाल दिया। जिससे रेखा कहराने लगी और बोली- आराम से करो विनोद , मैं कहीं भाग के थोड़ी जा रही हूँ। मैंने धीरे धीरे अपना 7 ” का लण्ड उसकी चूत में पूरा डाल दिया और अपनी स्पीड बढ़ा दी।

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मैंने रेखा की हिप को कस के पकड़ा और धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। जब रेखा खड़े खड़े थकने लगी तो मैंने रेखा को उसकी गांड से उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया और खड़े होकर उसे चोदने लगा। फिर मैं बाथरूम के कमोड पर बैठ गया और रेखा को अपने लण्ड पर बिठा कर चोदने लगा। रेखा की सिसकारियों से मैं पूरे जोश में आ गया और पूरी स्पीड से उसे चोदने लगा। करीब 15 मिनट के बाद मेरा लण्ड झड़ने के लिए तैयार हो गया। रेखा तुरन्त मेरे ऊपर से हट गई और नीचे बैठकर मेरी मुट्ठ मारने लगी। 30-40 सेकंड के बाद मेरे लण्ड अपना सारा लावा उगल दिया और तन्वी ने सारा वीर्य डब्बी में भर लिया। आधी डब्बी मेरे वीर्य से भर गई थी।

उसके बाद तन्वी वहाँ से चली गई और हमने अपनी अपनी पैंट पहनी और बाहर आकर बैठ गए। तभी रेखा ने कहा- दीदी इस लड़के में वाकयी दम है, आज रात जमकर चुदाई करेंगे। तभी तन्वी ने कहा- विनोद तुम हमारे टैस्ट में पास हो गए, क्या आज रात तुम हमारे घर आ सकते हो? मैंने जवाब में कहा- मैं जरूर आऊँगा, आप बस मेरा ख्याल रखना। कहीं आगे जाकर कोई मुश्किल न हो जाये। ‘तुम फ़िक्र न करो, हम जब भी किसी को वीर्य देते हैं, उनसे फॉर्म साइन कराते हैं ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो।’ मन की शांति होने के बाद मैं उनसे अलविदा लेते हुए वहाँ से निकल आया। तो दोस्तो, कहानी कैसे लगी पढ़ने के लिए थैंक शेयर जरूर करे

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