मेरे बॉस की बीवी संजना को संतुष्ट किया

नमस्कार दोस्तों मैं प्रकाश गुर्जर एक बार फिर आपके सामने एक और नया अनुभव लेकर आया हूँ। दोस्तो, यह बात उस समय की है जब ट्रांसफर जैसलमेर में हुआ और विभाग में मैं नया था।वहाँ मैं गिरिराज नगर में किराए से रहता था। Unfortunately दोस्तों वहीं पास में हमारे विभाग के एक अधिकारी का घर भी था जो दूसरे कार्यालय के अधिकारी थे।मुझे पता नहीं था.. फिर भी मैं आते-जाते उनकी बीवी को देखा करता था।उनकी बीवी का नाम संजना थावो देखने में तो कुछ खास नहीं थी.. फिर भी पता नहीं क्यों.. मेरी नज़र उनको देखती रहती थी, क्योंकि संजना का फिगर ही कुछ ही ऐसा था।देखने में तो 36-30-38 के भरे-भरे से आम के जैसे बूब्स थे.. जिन्हें देख कर मेरा मन करता था कि अभी जाकर सारा का सारा दूध निचोड़ लूँ और संजना गांड तो ऐसे मटका कर चलती थी कि मुर्दों के लंड भी खड़े हो जाएँ।इस बात को संजना भी भांप चुकी थी कि मैं उसको देखता हूँ।

ऐसा करते-करते 4 महीने बीत चुके थे। गर्मी के दिनों की बात थी दोस्तों.. मेरी छुट्टी थी तो मैं ऑफिस नहीं गया था।मैं अपने कमरे के बाहर कुर्सी लगा कर बैठा था.. तभी मैंने संजना की आवाज़ सुनी.. वो अपने मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी।थोड़ी देर बाद समझ आया कि संजना सर से बात कर रही थी। बात पूरी होने के बाद संजना ने मुझे देखा तो मुझे बुलाया।मैं संजना के पास गया तो वो मेरी ओर देखते हुए मुस्कुरा रही थी।संजना ने मुझसे मेरा परिचय पूछा.. तो अपने और अपनी जॉब बारे में मैंने उन्हें सब बताया।फिर संजना मुझसे बोली- हमारे बारे में जानते हो?मैंने मना किया- नहीं…संजना ने मुझे बताया कि संजना के पति मेरे के विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर हैं।तो मैं तो बुरी तरह से डर गया और सोचा कि अब तो मेरी नौकरी गई, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।संजना ने मुझे बताया कि उनका कूलर चलते-चलते ख़राब हो गया और उसे ठीक करने कोई नहीं आ रहा, क्योंकि उनकी लाइन पार्टी बिजी थी।

मैंने मन में सोचा कि आज अच्छा मौका है.. इसे मत जाने दे।मैं बोला- मैम मैं देख लूँ कूलर को?वो बोली- हाँ.. हाँ.. क्यों नहीं।मैंने कूलर को अन्दर से खोल कर देखा तो उसके मेन कनेक्शन में से एक वायर निकला हुआ था.. जो मैंने जोड़ दिया और बटन चालू किया तो संजना का कूलर चल गया।संजना बड़ी खुश हुई.. उन्होंने मुझे बिठाया और चाय बनाने चली गई।बाद में उसने सर को भी बोल दिया कि कूलर ठीक हो गया।जब हम चाय पी रहे थे तो संजना भाभी मेरी ओर झुक कर बैठी हुई थी.. जिसके कारण मुझे उनके बोबे दिखाई दे रहे थे।उनको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।उस समय मैंने लोअर पहन रखा था जिसके कारण वो स्पष्ट दिख रहा था। मैंने बहुत छुपाने की कोशिश की.. मगर संजना भाभी ने इसे भांप लिया था और मुझसे बोली- तुम मुझे क्यों देखते हो?

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मैं बोला- ऐसे ही।संजना फिर मेरे पास आकर बैठी और बोली- मैं सब समझती हूँ और जानती हूँ कि इस समय तुम्हारे मन में क्या चल रहा है।मैं चुप रहा।संजना आगे बोली- प्रकाश.. आपके सर इस काबिल नहीं है जो मुझे तन का सुख दे सकें क्योंकि शादी के बाद एक एक्सीडेंट की वजह से उनकी सेक्स करने की क्षमता कम हो गई और मैं इसके लिए तरसती रहती हूँ.. क्या तुम मेरी ये इच्छा पूरी करोगे?मैं बोला- संजना भाभी यह सच है कि मैं आपको देखता हूँ लेकिन मैं आपके साथ ऐसा नहीं कर सकता।मगर उन्होंने फिर दोबारा अपनी चाहत को दोहराते हुए मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी।फिर मैंने भी उनकी व्यथा को समझते हुए अपने आपको संजना के आगे सरेंडर कर दिया।मैंने भी देर न करते हुए संजना के लबों को अपने लबों के आगोश में ले लिया और उनके होंठों का रसपान करने लगा।

संजना भी मेरे लंड को लोअर के ऊपर से ही मसल रही थी और मैं उन्हें चूमते हुए उनके बूब्स को बड़ी बेदर्दी से एक-एक करके मसल रहा था।संजना भाभी ने गाउन पहना हुआ था तो मैंने गाउन के अन्दर हाथ डाल दिया।चूंकि संजना ने गर्मी के कारण अन्दर कुछ नहीं पहना हुआ था, तो मैं संजना के बूब्स की घुंडियों को मसलने लगा।मेरे ऐसा करने से वो बेचैन हो उठी और मेरे लंड को लोअर से बाहर निकालकर उसे अपने रसीले होंठों के बीच कैद करके उसे बड़े ही प्यार से लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.. मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगा।संजना मेरे लंड को जिस तरीके से चूस रही थी, मुझे लगा कि संजना कई दिनों की प्यासी हो।फिर अंत में मेरे लंड ने उनके मुँह में ही अपना ‘पिचकारी’ छोड़ दिया.. जिसे संजना बड़े प्यार से गटक गई और चाट-चाट कर मेरे पूरे लंड साफ़ कर दिया।

फिर मैंने संजना का गाउन उतारा तो अन्दर से वो पूरी नंगी थी।जिन बूब्स को मैं रोज़ देखने की तमन्ना रखता था, आज वो मेरे सामने थे।मैंने बड़े ही प्यार से संजना के एक निप्पल अपने दांतों से काटा तो संजना के मुँह से एक ‘सी..सी..’ करते हुए एक सीत्कार निकली।अब मैं उनके बूब्स को दबाते.. मसलते हुए एक-एक करके उनको चूसने लगा और संजना अपने मुँह से मादक सीत्कार निकालने लगी।‘आह.. आह.. उह्ह.. उह्ह.. सी.. आह.. मर गई..’दोस्तों जब मैं संजना के बूब्स को मसलते हुए चूस रहा था तो वो अपने ही दातों से अपने ही होंठों को काट रही थी और मेरे बालों में अपनी ऊँगलियाँ फेर रही थी।संजना के मस्त बूब्स को चूसते हुए मैं अपने एक हाथ को संजना के बदन को सहलाते हुए उनकी चूत के ऊपर ले जाकर चूत के दाने को मसलने लगा।

मेरे ऐसा करने से संजना और भी मस्ती में चूर होकर ‘उह्ह उह्ह आह आह हाय मैं मर गई’ जैसी सीत्कारें निकालने लगी।संजना भाभी की चूत एकदम गीली होकर धीरे-धीरे अपनी चूत से पानी छोड़ रही थी और संजना जल बिन मछली की भाँति तड़प रही थी और मस्ती में कह रही थी- मेरी जान.. इसी चीज़ का तो मुझे बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था.. इस निगोड़ी चूत ने बड़ा परेशान कर रखा था।फिर मैं धीरे से नीचे गया और उनकी चूत की पंखुड़ियों को अपने होंठों से चाटने व काटने लगा.. तो जैसे संजना तो पागल हो गई।मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदते हुए चाटने लगा और संजना भाभी अपनी कमर उचकाते हुए अपनी चूत को इस तरह चटवा रही थी कि जैसे मेरे मुँह में समां जाएगी।मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला था, उनको जैसे चटवाने का शौक था.. तो उसी तरह मुझे चाटने का शौक था।

फिर संजना भाभी बोली- प्रकाश मेरे भोसड़े में अपना लंड डाल दो.. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा…लेकिन मैं अपनी मस्ती में ही चूत चाटने में लगा हुआ था। संजना भाभी तो जैसे पागल हो रही थी.. अपनी मस्ती के नशे में चूर होकर वो मेरे बालों को नोचते हुए अपनी चूत को मेरे मुँह पर जोर-जोर से रगड़ने लगी।संजना की स्थिति को समझते हुए फिर मैंने अपने लंड को संजना की चूत के मुँह पर लगाया और एक धीरे से धक्का लगाया।संजना भाभी की चूत इतनी गीली थी कि ‘गप्प’ की आवाज़ के साथ मेरा लवड़ा संजना भाभी की चूत की गहराइयों में उतरता चला गया।फिर धीरे से मैंने अपने लंड को बाहर खींचा और वापस संजना भाभी की चूत में पेल दिया।फिर मैं संजना भाभी की चूत में अन्दर-बाहर.. अन्दर-बाहर.. लंड पेलने लगा और संजना भाभी भी हर धक्के का जवाब अपनी कमर को उचकाते हुए दे रही थी।

मैं अपने दोनों हाथों से संजना की कमर को पकड़ कर उसको चोद रहा था।संजना भाभी मस्ती के नशे में चूर होकर कह रही थी- चोद… मादरचोद… उम्ह्ह उम्ह्ह.. आह.. आह… हाय… चोद… मादरचोद.. आज मेरी चूत की खुजली मिटा दे.. मेरी चूत का भोसड़ा बना दे.. बहुत परेशान कर रखा है इस निगोड़ी ने.. आज के बाद मैं सिर्फ तुमसे ही चुदवाऊँगी.. घुसा दे अपना पूरा लंड मादरचोद.. आह.. आह .. हाय मेरी जान।हर एक धक्के पर गीली चूत के कारण ‘फच्च.. फच्च.. फच्च..’ की आवाज़ आ रही थी, जिसकी वजह से में भी पूरे जोश के साथ संजना भाभी की चुदाई कर रहा था।संजना को चोदते हुए मुझे 7-8 मिनट हो गए थे। अब मुझे भी लगने लगा था कि मैं अब झड़ने वाला हूँ।

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चुदाई करते हुए मैंने संजना भाभी से कहा- मेरा पानी छूटने वाला है.. तो अन्दर ही छोड़ दूँ या बाहर…संजना भाभी बोली- अन्दर ही छोड़ दो.. मेरे कोई बच्चा नहीं है।फिर मैंने देर न करते हुए अपने लंड को चूत से बाहर निकाला और संजना भाभी के दोनों पैरों को उठाते हुए अपने कन्धों पर रखा और वापस अपने लंड को संजना की चूत में पेल दिया और जोर-जोर से उसकी चूत चोदने लगा।जैसे ही संजना भाभी ने कहा- मेरा पानी छूटने वाला है।उसी समय मेरा लंड भी जवाब देने वाला था तब मैंने संजना भाभी के पैरों को पूरी तरह से उठाते हुए संजना के पैरों के घुटनों को उन्हीं के कन्धों से मिला दिया।मेरे ऐसा करने से संजना भाभी की चूत थोड़ा और ऊपर की ओर उठ गई और मैं जोर-जोर से उसकी चूत को चोदने लगा।

फिर करीब 8-10 धक्कों के बाद हम दोनों एक साथ झड़ने लगे और मेरे लंड की एक-एक बूंद संजना की चूत में उतर गई। उस समय संजना भाभी ने मुझे अपने शरीर से पूरी तरह चिपका लिया। हम दोनों के शरीर पसीने से लथ-पथ हो चुके थे।जब हम नार्मल हुए तो संजना भाभी ने मुझे धन्यवाद दिया और मुझसे बोली- मैं आजीवन तुम्हें नहीं भूलूंगी।उसके बाद हम दोनों साथ-साथ नहाए और नहाते हुए एक और चुदाई का राउंड लिया।नहाने के बाद संजना भाभी ने मुझे बिठाया और अपने हाथों से खाना बनाया और फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया।फिर संजना भाभी मुझे 2000 रूपये देते हुए कहा- ये आपका इनाम और फिर जरुरत पड़े तो मांग लेना.. आज से मैं अब तुम्हारी हुई।

मैंने वो पैसे लेने से इंकार कर दिया और संजना भाभी से बोला- मैं ये काम पैसे के लिए नहीं करता बल्कि मुझे चुदाई करने का शौक है.. इसलिए करता हूँ। आप अपने पैसे अपने पास रखिए.. हाँ.. अगर कभी मुझे इनकी जरुरत पड़ी तो आप से जरुर मांग लूँगा। फिर उसके बाद मैं चला गया। फिर मुझे जब भी मौका मिलता तो मैं संजना की चूत की भूख मिटाता। फिर एक दिन उन्होंने मुझे अपने गर्भ से होने की बात बताई तो मैं भी बहुत खुश हुआ। बाद में संजना भाभी ने सारी बात सर को बताई तो उन्होंने भी परिस्थिति से समझौता करते हुए मुझे बुलाकर मेरा धन्यवाद करते हुए कहा- जीवन में जब कभी भी हमारी जरुरत पड़े तो निसंकोच आ जाना। उसके बाद तो मेरी जैसे लाटरी निकल गई। मतलब बाद में मैंने संजना भाभी की दो ओर सहेलियों को चोदा.

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