मेरी पड़ोसन रिंकू को बीपी दिखा के चोदा

मेरा नाम अमर है.. मैं साइंस का छात्र हूँ.. मेरी उम्र 24 है। मेरे लोडे का साइज 6.8″ है.. मेरी बॉडी थोड़ी अच्छी है। मेरे कॉलेज की लड़किया भी मुझे पसंद करती है। दोस्तों आज जो में कहानी आप को सुनाने वाला हु वो मेरी हॉट पड़ोसन की है।  यह बात उस समय की है.. जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक पंजाबी फॅमिली रहती थी। उनकी फॅमिली में पम्मी आंटी.. सुकविंदर अंकल.. उनका बेटा करतार और एक सेक्सी बेटी रिंकू थे। दोस्तों रिंकू बहुत सेक्सी और कामुक थी। रिंकू के नशीला जिस्म का कटाव बूब्स 34 कमर 28 गांड 36 वाले सांचे में ढला हुआ था। रिंकू का रंग किसी फॉरेनर की तरह एकदम गोरा.. रिंकू हमेशा ऐसी ब्रा पहनती थी कि उसके बूब्स रॉकेट की तरह लंड पर वार करते थे। मैं हमेशा से ही रिंकू के बूब्स को देखने की फ़िराक में रहता था और जब कभी रिंकू की ब्रा के थोड़े से भी दर्शन हो जाते.. तो मेरा लंड रिंकू की जवानी को सलामी देने लगता था।

मैं हमेशा रात के वक्त रिंकू को चोदने के सपने देख कर लंड हिला कर पानी निकाल ता था। यह सोच कर कि कभी तो खुदा मेरे प्यासे लंड के बारे में भी सोचेगा.. मैं अपना लंड सहलाता रहता था। और दोस्तों भगवान ने मेरी सुन ली और वो दिन आ ही गया जनुअरी महीने की 15 तारीख को पम्मी आंटी के भाई के लड़के  रोहन की शादी थी.. लेकिन रिंकू के प्री-बोर्ड के पेपर होने के कारण रिंकू नहीं जा सकती थी.. तो पम्मी आंटी ने मुझे रात को उनके घर सोने के लिए बोला। मेरे दिल की मुराद पूरी होती दिख रही थी तो मैंने झट से ‘हाँ’ कर दी। आख़िर वो समय आ ही गया.. अंकल आंटी और करतार शादी में चले गए। मैं शाम को स्कूल से आते ही सोचने लगा कि रिंकू की जवानी के मजे कैसे लूँ… मैंने अपने एक दोस्त से ब्लू-फिल्म की सीडी मँगवाई। रिंकू के घर जाते ही मैंने वो सीडी रिंकू के टीवी के पास पड़ी बाकि कद में मिक्स कर दी। घर पहुँचते ही रिंकू और में बातें करने लगे.. थोड़ी देर बात करने के बाद मैंने रिंकू को कहा- चलो मूवी देखते हैं। तो रिंकू मना करने लगी.. कहने लगी- मैंने सब देख रखी हैं।

मैंने कहा- कल करतार को मैंने सीडी की दुकान पर देखा था.. इन सीडी में देखो.. क्या पता करतार कोई नई मूवी की सीडी लाया हो…
तो रिंकू तैयार हो गई.. रिंकू फ्रिज में से कोल्ड ड्रिंक ले आई और सीडी देखने लगी। पहले रिंकू ने अपनी पसन्द की मूवी ‘कैरी ऑन xxx’ देखी.. रिंकू बहुत ही कॉमेडी की मूवी थी। उसके बाद भी हम दोनों को नींद नहीं आ रही थी तो मैंने कहा- कोई और मूवी लगाओ। तो रिंकू और सीडी देखने लगी और आख़िरकार अब उसके हाथ में वो ब्लू-फिल्म की सीडी आ गई थी.. जो मैं लाया था। मैंने रिंकू को कहा- मैं वाशरूम जा कर आता हूँ.. मैं रिंकू को वो फिल्म देख कर गरम होने का वक्त देना चाहता था। मैंने जल्दी से वाशरूम से फ्री हुआ और छुप कर रिंकू को देखने लगा। फिल्म शुरू होते ही रिंकू चौंक गई कि यह कैसी मूवी है… बाद में रिंकू ने चारो तरफ देखा.. शायद रिंकू मुझे देख रही थी कि मैं रिंकू को देख तो नहीं रहा.. फिर रिंकू मूवी देखने लगी।

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धीरे-धीरे रिंकू की आँखों में सेक्सी नशा सा आने लगा.. रिंकू का हाथ खुद रिंकू की पैन्टी में घुस गया और रिंकू शायद अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी। मैं रिंकू को देख रहा था और सही मौके का इंतजार कर रहा था। रिंकू को इतना मजा आ रहा था कि रिंकू को ध्यान ही नहीं रहा कि मैं घर में हूँ। रिंकू ने अपनी टॉप और ब्रा ऊपर करके अपने बूब्स को दबाने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी आअह.. आह.. आह.. हा…’ की आवाजें रिंकू के मुँह से निकल रही थीं। मैंने मौके का फायदा उठाया और चुपके से रिंकू के पीछे जा कर खड़ा हो गया। फिर मैंने रिंकू को कहा- रिंकू क्या कर रही हो? रिंकू चौंक गई और अपनी शर्ट नीचे करने लगी। मैं उसके पास जाकर बैठ गया और रिंकू को बोला- क्या हुआ.. रुक क्यों गई? रिंकू ने कुछ जबाव नहीं दिया.. रिंकू बहुत डर गई थी।

मैंने उसका हाथ पकड़ कर कहा- घबराओ मत.. मैं किसी को नहीं कहूँगा और मैं तुम्हारा हम-उम्र हूँ.. मैं समझता हूँ कि इस उम्र में ऐसा होता है.. करता है दिल ऐसे करने का… अब मेरी दिलासा पूर्ण बातों से रिंकू थोड़ी शांत हुई.. मैंने रिमोट उठा कर मूवी की आवाज़ बढ़ा दी और रिंकू का हाथ पकड़ लिया। अब हम दोनों सेक्सी मूवी देखने लगे। रिंकू फिर से गरम होने लगी.. रिंकू की आँखों में नशा सा छाने लगा। मैंने रिंकू का हाथ छोड़ दिया वो और गरम होने लगी और मेरा भी लंड रिंकू की जवानी को सलामी देने लगा। रिंकू के हाथ फिर से.. खुद के बूब्स की तरफ जाने लगे। मुझे अब वो जन्नत दिखी.. जिसको देखने की मैं बरसों से कोशिश कर रहा था। मैं अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पाया और मैंने रिंकू के बूब्स के चूचुकों को छेड़ा और एक को अपने मुँह में ले लिया।

रिंकू मस्त निगाहों से मेरी आँखों में देखने लगी.. मैं बूब्स के चूचुक को चूसने लगा… रिंकू चौंक गई.. लेकिन मैंने रिंकू की परवाह ना करते हुए अपना काम चालू रखा। थोड़ी देर बाद रिंकू को मजा आने लगा तो रिंकू अब सिसकारी ले रही थी.. लंबी-लंबी साँसें ले रही थी। मैं समझ गया कि अब रिंकू मना करने की हालत में नहीं है। मैंने रिंकू के दूसरे बूब्स को भी दबाना शुरू किया। अब रिंकू अपनी शर्ट ऊपर करके मेरा साथ देने लगी.. वासना के मारे अपना सर इधर-उधर करने लगी। फिर रिंकू उत्तेजनावश अपने होंठों को अपने दाँतों के नीचे दबाने लगी। मैं धीरे-धीरे नीचे आने लगा और रिंकू के पेट पर चुम्बन करने लगा। अब वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी मैं अब रिंकू के होंठों पर चुम्बन करने लगा.. रिंकू पागलों की तरह मेरे होंठों को किस्स कर रही थी।

मैंने रिंकू के कन्धों पर चुम्बन करके रिंकू को मदहोश कर दिया.. उसके मुँह से सिर्फ़ ‘आह.. ओह.. हा.. हा..’ की सिसकारियाँ निकल रही थीं।
मैंने रिंकू की शर्ट निकाल कर फेंक दी और उसकी मोसम्बियों को चूसने लगा। रिंकू मेरा साथ दे रही थी.. मैंने रिंकू का लोवर उतारने के लिए पकड़ा उसने भी गाण्ड उठा कर मेरा साथ दिया और मैंने उसका लोवर उतार फेंका। वो दिन मेरी जिंदगी का बहुत कीमती दिन था। जिसको देख कर मेरा लंड सलामी देता था.. रिंकू आज नंगी मेरे सामने थी। मैंने रिंकू की जाँघों को चूमा.. तो रिंकू सिहर उठी… फिर मैंने रिंकू की लाल कलर पैन्टी उतार दी। हय.. मेरे सामने तो जन्नत नंगी खड़ी थी.. मैं तो जैसे सपना देख रहा था कि वो मेरे सामने नंगी खड़ी है। मैं उसको पागलों की तरह चूम-चाट रहा था.. वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब मैंने उसकी टाँगें फैला दीं और उसकी चूत के बिल्कुल सामने आ गया।

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क्या मस्त चूत थी उसकी.. एकदम गुलाबी.. उसकी चूत पे एक भी बाल नहीं था.. शायद उसी दिन साफ़ की होगी। फिर मैंने रिंकू की चूत के दाने पर जीभ रखी वो सिहर गई.. उसने मेरे बाल पकड़ लिए। मैंने उसकी चूत के दाने को जीभ से चाटना शुरू किया रिंकू सीत्कारियाँ ले रही थी। ‘आह ओह हहहहहहह.. आह.. उह हाय.. उह उफ़…’ उसके मुँह से नशीली आवाजे निकल रही थीं। हय.. क्या स्वाद था.. उसकी चूत का.. प्री-कम की बूँदों ने रिंकू की जवान कुँवारी चूत का स्वाद.. मस्त मदहोश करने वाला बना दिया था। मैं पागलों की तरह उसकी चूत को चूसे जा रहा था और उसके चूचों को दबा रहा था। मुझे पता भी नहीं लगा कि कब वो झड़ गई.. उसने मेरा मुँह अपनी चूत से हटा दिया। मैंने उसके मुँह पर देखा जैसे रिंकू इस परम आनन्द के लिए मुझे धन्यवाद कर रही थी।

लेकिन मेरा अभी कुछ नहीं हुआ था.. मैंने फिर उसके होंठ चूसना शुरू कर दिए और बूब्स को सहलाने लगा। रिंकू की बूब्स को मुँह में लेकर चूसने लगा.. थोड़ी देर बाद रिंकू फिर से उस पुराने जोश के साथ मेरा साथ देने लगी। मैं समझ गया कि अब माल तैयार है। अब मैंने फिर रिंकू की टाँगों को फैलाया और रिंकू की चूत के सामने आ गया। उसकी चूत के दाने पर अपना लंड लगाया.. रिंकू सिहर उठी। मैं अपना लंड रिंकू की चूत के दाने पर रगड़ता रहा.. मैं उसको इस हद तक तड़पाना चाहता था ताकि रिंकू खुद कहे कि अन्दर डालो… रिंकू बस लंड के अन्दर जाने का इंतजार करते हुए सिसकारियां ले रही थी। रिंकू के मुँह से ‘सी.. सी.. सी..उह..’ की आवाजें निकल रही थीं। तभी रिंकू के सब्र का बाँध टूटा और उसने बोला- करो भी.. अब क्यों तड़फा रहे हो…

मुझे तो इसी पल का इंतजार था.. मैंने उसकी चूत के होंठों पर अपने लंड का सुपारा लगाया और झटके से अन्दर करने की कोशिश की.. रिंकू की चीख निकल गई। जबकि लंड तो केवल नाम मात्र का ही रिंकू की चूत में गया था। मैंने रिंकू के होंठ चूसने शुरू किए ताकि उसको दर्द का अहसास कम हो। मैंने एक और झटका मारा लेकिन फिर भी लंड थोड़ा सा ही अन्दर गया। अब मैं उठा और रसोई से सरसों का तेल लाया और रिंकू की चूत पर और अपने लौड़े पर लगा लिया। अब फिर सुपारा उसकी चूत पर रख कर झटका मारा.. तो लंड उसकी चूत में थोड़ा घुसा.. पर वो छटपटाने लगी। मैंने उसके होंठों पर चुम्बन करना शुरू दिया जिससे रिंकू का दर्द कम हुआ। फिर मैंने उसके जोश को बढ़ाने के लिए उसके कन्धों पर चुम्बन करना शुरू किया। अब उसका दर्द कम होने लगा और वो फिर गाण्ड उठा कर मेरा साथ देने लगी।

मैंने उतना ही लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया.. फिर उसके होंठों पर चुम्बन करते हुए अचानक ही मैंने एक और ज़ोर का झटका मारा और इस बार मेरा लंड आधे से ज्यादा उसकी चूत में घुस गया था। मेरे होंठ उसके होंठों पर चिपके होने के कारण रिंकू चीख नहीं पाई.. बस सर इधर-उधर करके दर्द को सहती रही। मैंने उसके बूब्स को चूस-चूस कर उसको मजा दिया ताकि उसका दर्द कम हो जाए। थोड़ी देर बाद होंठों और बूब्स की चुसाई के बाद उसका दर्द कम होने पर.. फिर रिंकू गाण्ड हिला-हिला कर मेरा साथ देने लगी और मैंने फिर उतना ही लंड आगे-पीछे करना शुरू किया। अब उसको बहुत मजा आ रहा था.. रिंकू अपनी कमर उठा-उठा कर लंड को अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी।

मैंने फिर एक ज़ोर के झटके के साथ पूरा लंड उसकी चूत में ठेल दिया। तो रिंकू की आँखें फटी की फटी रह गईं। शायद रिंकू की सील टूट गई थी.. मैंने फिर से उसके बूब्स को सहला कर और होंठ चूस कर बूब्स को चूस कर रिंकू का ध्यान बंटाने की कोशिश की। मैं नहीं चाहता था कि रिंकू अपनी चूत से निकलते हुए खून को देख कर घबरा कर सारा मजा खराब करे। मेरी कोशिश कामयाब हुई.. रिंकू फिर मजे में आकर गाण्ड हिलाने लगी। अब मैं धीरे-धीरे लंड उसकी चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। रिंकू के मुँह से ‘सी सी..सीईईई.. आहह आहह.. उहह..’ निकल रहा था। मैंने अपनी रफ़्तार थोड़ी बढ़ाई रिंकू को और मजा आने लगा।

अब रिंकू के मुँह से निकल रहा था ‘चोदो और चोदो.. ज़ोर से.. और ज़ोर से चोदो.. फाड़ दे मेरी चूत को..’ उसके मुँह से यह सब सुनकर मैं हैरान था। मैं और रफ़्तार से रिंकू को चोदने लगा और साथ ही उसके बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा। मैंने उसके बूब्स पर दाँत मार दिए रिंकू ने हँस कर मेरे गाल पर प्यार से मार कर इसका जबाव दिया और कहा- आराम से खाओ.. तुम्हारे ही हैं। मैं और जोश में आ गया। रिंकू अब तक दो बार झड़ चुकी थी, मैं रिंकू को चोदे जा रहा था। उसके मुँह से ‘आ.. आहह ओह हा हा और चोदो.. और चोदो.. फाड़ दो मेरी और ज़ोर से.. हाँ हाँ.. और ज़ोर से..’ निकल रहा था। रिंकू की आवाज़ में तेज़ी आ गई और एक बार फिर उसका शरीर अकड़ने लगा और रिंकू चौथी बार झड़ गई।

उसने मुझे कस कर गले से लगा लिया पर मेरे लंड का काम नीचे चालू था.. रिंकू उसकी चूत को चोदे जा रहा था। कुल आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं भी झड़ने की कगार पर था। मैंने उसको पूछा- अन्दर छोड़ दूँ क्या? उसने कहा- मुझे तुम्हारे लंड का पानी पीना है। मैंने लंड रिंकू की चूत से बाहर निकाला और उसके मुँह में डाल कर रिंकू के मुँह के अन्दर ही माल छोड़ने की तैयारी में था। मैं अभी भी उसके बूब्स को दबा रहा था। फिर मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं रिंकू के मुँह मे झड़ गया। उसके बाद हम दोनों लिपट गए और निढाल होकर चिपक कर लेट गए। उस रात हमने 3 बार चुदाई की और उसके बाद अब जब भी मौका मिलता है.. हम दोनों खुल कर चुदाई करते हैं।

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