मुंबई के जंगल में मंगल

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नमस्कार दोस्तों में मुंबई मरोल नाका में रहता हूँ और मेरा नाम संजय है मेरा अभी कॉलेज में २ण्ड ईयर चल रहा है मेरी कॉलेज गोरेगाव में है में रोज कॉलेज बस में उप डाउन करता हूँ। मेरे साथ एक बहुत ही सेक्सी लड़की पढ़ती है उसका नाम नमिता है जिसे कॉलेज के सरे लड़के चोदना चाहते है लेकिन आसानी से पटने वाली लड़की नहीं है लेकिन नमिता मरोल बामणदायापाड़ा में रहती और वो भी मेरे साथ कॉलेज बस में आती जाती है। वैसे में कॉलेज में किसी लड़की से बात करने में जय्दा ध्यान नहीं देता था लेकिन एक दिन की बात है की मुझे नमिता से बात करनी पड़ी कुछ पढाई के सिलसिले में तो हम दोनों ने एक दूसरे को इंटरडूस किया।

मैं रोज रात को नमिता के ही बारे में सोच कर अपने लंड को मसला करता था फिर हम दोनों में धीरे धीरे बाटे होने लगी अब तो हम बस में भी साथ साथ बेट के आने लगे करीब 2 महीने बाद की बात है गर्मी का टाइम था हम दोनों बस में आरहे थे तो मेने नमिता को कहा की आज हम आरे कॉलोनी में उतर जाते है थोड़ी देर घूमेंगे और घर चलेंगे उस दिन उसका मूड भी अच्छा था तो उसने भी मुझे मना नहीं किया। और फिर हम बस से उतर गए और जंगल टी तरफ चले गए हम लोग बाते करते करते एक पहाड़ के पास पहुंच गए। और हमने आस पास देखा तो दूर दूर तह कोई नज़र नहीं आरहा था तो हम वही पर बैठ गए।

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अब हम वहीँ बैठकर बात करने लगे और मेरा रोमांस का कीड़ा भी जागने लगा | हम बातों में मग्न हो रहे थे और मेने अपनी उँगलियाँ नमिता की जाँघों पर लहराने लगा | अब नमिता भी रोमांस के परवान चढ गयी और हम एक दूसरे को चुमते हुए बेसबर हो गए | मैंने नमिता  के टॉप के अंदर हाथ डाल बूब्स को दबाने लगा | मैं अब पूरी तरह तन गया और उन देसी लड़की, दीदी टॉप को उतार दिया और नमिता के चुचों को मुंह से पीने लगा।चुदाई का मन अब जोर देने लगा तो मैंने नमिता की पैंट को उतार दिया और नमिता की चुत में ऊँगली डालने लगा जिसपर नमिता बार गरम हो उठी थी बिलकुल चुदाई के लिए तैयार | अब मैंने अपने लंड को देसी नमिता की चुत का रास्ता दिखा दिया था जसि में मेरा लंड बिना रोके बस चुदाई की छप्प – छप्प आवाजें निकाले जा रहा था | हमें अब सेक्स का असली मज़ा आ रहा था |

मैंने अब नमिता को अपने उप्पर बिठा लिया और नीचे से अपने लंड को देने लगा जिससे हम अब खूब मज़ा आरहा था। अब में नमिता की चुत से में डूब चूका था और अपने लंड के आखिरी के झटकों में वहीँ चुत मुहाने पर मसलने लगा और सारा मुठ का मुठ निकल पड़ा | नमिता अब भी गहरी लंबी सांसें भरती हुई अपनी सेक्सी नज़रों से मुझ पर प्यार बरसा रही थी और मुझे भी चुदाई का गर्व महसूस हो रहा था दोस्तों मेने वो जवान छूट की ठुकाई की जिसे ठोकने की कोई सोच नहीं सकता था कॉलेज में।फिर हम लोग घर चले गए और जब भी चुदाई का मन करता हम अपनी वही मनपसंद जगह पर जा के चुदाई करते थे।

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