मनीषा की बाज़ार में चुदाई

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अभिषेक है और में दिल्ली में रहता हूँ। और में राजस्थान से बिलोंग करता हूँ मेरा परिवार पिछले करीबन 25 साल से दिल्ली में शिफ्ट है  में दिल्ली की एक कॉलेज में पढाई करता हूँ। दोस्तों में आप को बता दू की में 2 साल से जिम जाता हु इस लिए मेरा बॉडी एकदम गठीला है और में काफी हॅंडसम लगता हु। इस वजह से कोलाज की ज्यादातर लड़किया मुझ पे मरती है और में कॉलेज की क्रिकेट टीम का कप्तान हु इस लिए हर लड़की का में ड्रीम बॉयफ्रेंड हु। बात उस दिन की है, जब मैं और मेरी दोस्त मनीषा, जो मेरी कक्षा में ही है, हम दोनों बाज़ार में गए। उस दिन शनिवार था हम दोनों घूम रहे थे अचानक ही कुछ मेरे पीछे आकर लगा और मेरा हाथ उसकी गाँड पर जा टकराया।

पहले उसने मुझे गुस्से से देखा, पर बाद में जब मैं ने कहा कि गलती से लग गया, तो मनीषा मुस्कुरा कर बोली… “कोई बात नहीं।” और हम ५-१० सेकंडों तक एक दूसरे की आँखों में ही देखते रहे…. फिर मनीषा शरमाई… और आगे चल पड़ी… मनीषा की बड़ी बड़ी गांड देख कर मेरा लंड सलामी देने लगा और मेरी जींस ऊपर से थोड़ी गीली हो गई, जिसे मैंने अपने हाथ से साफ़ कर दिया।  कुछ देर घूमने के बाद हमने कोल्ड ड्रिंक लिया और आगे चल दिए। फिर अचानक मुझे पीछे से किसने धका मारा तो मेरी साडी कोल्ड ड्रिंक मनीषा के बूब्स पे जा गिरी जिस वजह से उसका टॉप गिला हो गया था।

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उस टॉप के अंदर से मनीषा की पिंक वाली ब्रा साफ दिख रही थी मनीषा के वो गोरे गोरे बूब्स के मुम्मे और उस पर वो काला तिल देख कर मेरा लण्ड जींस फाड़ने की कोशिश करने लगा। फिर मेने दूसरी साइड मुड़  कर अपने लण्ड को अपने हटो से दभा दिया ये हरकत मनीषा ने देख ली और मुझे तिरछी नज़रो से देखते हुए सरमने लगी। तो थोड़ा में भी मुस्कुरा दिया और हमने आँखो ही आँखो में एक दूसरे को साडी बात समजा दी। लेकिन वो थोड़ी शरारती थी तो उसने मुझे कहा की तुम अपने हैट के निचे क्या छुपा रहे हो। फिर मुझे लगा की मोके पे चौका लगाना लगाना चाहिए तो मेने भी कहा की अगर इसे नहीं छुपाया तो ये कोई बिल के अंदर घुस जायेगा।

ये सुनते ही वो जोर जोर से हसने लगी और मेरे सर को पकड़ के मेरे गाल पे एक चुम्मा दे दिया और दोस्तों क्या बताऊ इस चुम्मे ने मेरी उत्तेजना इतनी बढ़ा दी की में भी मनीषा को चूमने लगा। इतने में हमे अहसास हुआ की हम बाजार के अंदर है और सरे लोग हमे ही देख रहे है तो आगे चल दिए अब चलते चलते मेने जानबूझ कर उसकी गांड पर हाथ मारा और मनीषा मुझे देख कर कामुक मुस्कराहट देने लगी।  फिर मेने मनीषा को कहा की क्या में तुम्हे पसंद हु तो मनीषा बोली की है तुम मुझे बहुत पसंद हो में तुम्हे रोज देखती हु जब तुम अपनी टी-शर्ट खोलते हो तो तुम्हारी छोड़ी छाती मुझे दीवाना बना देती है। तो मेने मनीषा को बोल् दिया की क्या तुम मुझसे चुदना चाहोगी तो मनीषा १ सेकंड की देरी न करते हुए कहा की छोड़ना तो है लेकिन कहा करे चुदाई।

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तो मेने कहा की मेरे ध्यान में एक जगह है  चलो तो मनीषा ने भी कहा की चलो में पास के नई कन्ट्रशन बिडिंग में ले गया और मनीषा को कहा की हम सीढ़ियों पे ही चुदाई करेंगे। तो मनीषा ने कहा की जैसा आप कहे जनाब में तो जहा आप कहेंगे वहा चुदवाने के लिए तैयार हूँ। फिर मैंने मनीषा की तरफ देखा तो मनीषा ने मुझे हस्ते हुए आँख मारी और तुरंत ही मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए। मैं तो पहले से ही उत्तेजित था, मैंने उसकी बूब्स दबानी शुरु कर दी।  तभी मैंने महसूस किया कि पीछे कुछ है  बाद में पता चला कि वो मनीषा के हाथ ही हैं, जो मेरी गाँड में ऊँगली डाल रही थी। वो पागलों की तरह मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी गांड दबा रही थी।

मैं भी भरपूर जोश में आ गया था। मैंने उसकी जीन्स उतार दी और उसकी पैन्टी के ऊपर से ही अपनी ऊँगली घुमाने लगा। वो सिसकारियाँ भर रही थी। तभी उसने मेरी जीन्स उतार दी और मेरे लंड के सुपाड़े के ऊपर से अपनी ऊँगली घुमाने लगी। मैं पागल होता जा रहा था। मैंने उसकी टॉप उतारी और उसकी ब्रा को मरोड़ दिया। तभी उसकी ब्रा की हुक अपने आप खुल गई और मैंने पागलों की तरह उसके मम्मों को चूसना शुरू कर दिया। साथ ही वो मेरा लंड भी मसल रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को रगड़ रहे थे। मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह से लगाया और चूसना शुरू कर दिया।

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वो “अह्ह्ह आया…आ…आई……वू…” करने लगी। जिससे मुझे और मज़ा आने लगा। मैं अपनी जीभ उसके निप्पल के आगे गोल-गोल घुमा रहा था। उसके गोरे-गोरे मम्मे मुझे धन्यवाद कर रहे थे। वे एक दम लाल हो गए थे, नीचे मेरा लंड भी लाल हो चुका था। तभी वो झुकी और मेरे लौड़े को चूसने लगी। उसने हर एक जगह से मेरे लौड़े को चूसा और पूरे का पूरा लौड़ा अपने मुँह में डाल लिया। उसका अपने ऊपर क़ाबू नही रहा था और वो मेरा लंड लगभग चबाने लगी, जिससे मुझे मीठा दर्द होने लगा और मज़ा भी आ रहा था।

तभी मैंने उसे उठाया और उसे चूसने के बाद उसे नीचे लिया और उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। उसका दाना अपनी जीभ से रगड़ना चालू कर दिया और वो भी मेरा साथ देने लगी और अपना हाथ मेरे सिर पर रख कर अन्दर की ओर धकेलने लगी। वह मुझे बहनचोद और मादरचोद जैसी गालियाँ देने लगी। तभी उसकी टाँगें सीधी हो गईं और वो मेरे मुँह में ही झड़ गई। मैं उसका सारा पानी पी गया। फिर मैंने उसे अपनी नीचे लिटाया और अपना लंड सीधा उसकी चूत के द्वार पर रख दिया और धीरे-धीरे मसलने लगा। वो चिल्ला उठी, “बहनचोद, अब चोद भी दे।” मैंने एक ही झटके में अपना पूरे का पूरा लंड घुसा दिया और फलचच्च करके एक दम से आवाज़ आई और फिर वो चिल्ला उठी… “आआआआआआआअ..”।

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मैंने झटके एक दम से तेज़ कर दिए। “रंडी आज तो तेरी चूत फाड़ कर ही घर वापिस जाऊँगा… और वो बोली “हाँ बहनचोद… आज अपनी रंडी… की चूत का भोसड़ा बना दे… आह आआ… आई… साले चोद… आह्ह आआआआह” और वो पागलों की तरह मुझसे लिपट गई। वो मेरे निप्पल चूसने लगी…. .. ऐसे करते-करते हम दोनों झड़ गए और एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कुराये…. और.. एक दूसरे के होंठों पर चुम्बन लिए, फिर कपड़े पहन लिए। ये सिलसिला अब रोज़ की तरह चल पड़ा। मैं रोज़ उसे चोदता और वो रोज़ चुदती। इसी प्रकार हमें एक दूसरे से प्यार हो गया और हम अब गर्लफ्रेंड और ब्वॉयफ्रेण्ड हैं।

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