मधु के साथ पल दो पल की खुशी

मेरा नाम निमेष है, मेरी उम्र 25 वर्ष है, मुंबई का रहने वाला हूँ, मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा हूँ। tk.24feed.ru.XYZ पर यह मेरी फर्स्ट स्टोरी है, अगर कोई गलती हो तो मैं आप से माफ़ी चाहता हूँ। वैसे मुझे tk.24feed.ru.XYZ की कहानियाँ बेहद ही पसंद है और उसी से मुझे लगा कि मुझे भी अपनी कहानी आप सबको बतानी चाहिए। मेरा लंड 7″ इंच का है मैं पढ़ने में बहुत अच्छा था, सभी मुझे प्यार करते थे और मैंने कभी इन बातों पर ध्यान भी नहीं दिया था। पर जैसे जैसे उम्र बढ़ती है तो अच्छे अच्छे को बदल देती है, मैं अपने लंड को और लड़कियों के आकर्षण को महसूस करने लगा था। ये सब मेरी लाइफ में ऐसे होगा मैंने कभी भी सोचा नहीं था। दोस्तों बात उन दिनों की है जब मैंने मैकेनिकल इंजिनियरिंग में एडमिशन लिया। मेरे हाउस के सामने वाले फ्लैट में एक मैरिड औरत रहती थी, उसका नाम मधु था।

मधु का रंग दूध सा गोरा, उम्र होगी 25-26 साल और फिगर तो 36-26-32 रहा होगा, मधु जब चलती थी तो ऐसा लगता था कि किसी ने मेनका को इंद्र के स्वर्ग से धरती पे भेज दिया हो… मधु को देखते ही मेरे मन को पता नहीं क्या हो जाता था, मचलने लगता था और लंड मधु को सलामी देने लगता था।  खैर कुछ दिन ऐसे ही बीत गये मधु को दूर से देखते देखते… मैंने जब भी मधु को देखा वो हमेशा मुझे हंसती हुई, खिलखिलाती हुई नज़र आती पर मैंने मधु के पति को आज तक नहीं देखा था। एक दिन मेरे फ्लैट की घंटी बजी, मैंने सोचा कोई होगा, जब देखा तो मेरे होश उड़ गये… दरवाज़े पर मधु खड़ी थी हाथ में प्लेट लेकर ! मधु ने पिले रंग की साड़ी पहन रखी थी और स्लीवलेस ब्लाउज़… काम की देवी लग रही थी वो! मैं तो मधु को देखता ही रह गया। अचानक मधु बोली- मेरी बहन संजना की शादी थी, उसी की मिठाई है। मैंने प्लेट ले ली और मधु चली गई। मैं मधु के बारे में सोचता रहा और मधु के नाम की मुठ मारी।

उस दिन मुझे पता चला कि जिस तरह इंसान खाने के बिना नहीं रह सकता उसी तरह सेक्स भी उतना ही ज़रूरी है। एक दिन मुझे मधु के घर से रोने की आवाज़ें सुनाई दी। मैंने सोचा कि पता नहीं क्या हुआ होगा, मैं भागकर पहुँचा और घंटी बजाई। काफ़ी देर बाद मधु ने डोर खोला… मैं- मुझे कुछ रोने की आवाज़ें सुनाई दी आपके यहाँ से, क्या हुआ? कोई तख़लीफ़? मधु- नहीं नहीं… ऐसा कुछ नहीं है.. आपको शायद कुछ वहम हुआ है। मैं- ओह्ह.. हो सकता है पर मुझे लगा कि शायद वो आपकी आवाज़ थी.. मधु- अरे नहीं नहीं.. मैं कभी नहीं रोती.. और कहते कहते मधु रोने लगी, आँसू की धार उसके गालों तक आ गई.. मैं- आख़िर बताइए तो बात क्या है, शायद मैं आपकी कुछ मदद कर सकूँ? मधु- आप मेरी कोई मदद नहीं कर सकते, प्लीज़ आप चले जाइए। मैंने सोचा कि चला जाता हूँ लेकिन फिर मेरी इंसानियत ने मुझे रोका और सोचा कि एक अकेली औरत को ऐसा रोते हुए छोड़ कर जाना ठीक नहीं है।

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मैंने कहा- आप कुछ भी कह लें पर मैं तब तक नहीं जाने वाला जब तक आप बताएँगी नहीं। फिर मधु  मुझे अंदर लेकर गई और डोर बंद करके बोली- आख़िर आप चाहते क्या हैं? एक औरत अकेली रो भी नहीं सकती? मैं- रो सकती है अगर रोने से प्रॉब्लम का कोई हल निकल आए तो… आख़िर आप बात तो बताइए कि क्या हुआ है? मधु- यह बात मुझसे और मेरे पति से रिलेटेड है.. मरे पति का नाम राजेश है मैं- अगर बताने लायक हो तो बता दीजिए, वैसे मैंने तो आपके पति को देखा भी नहीं.. मधु- देखा तो एक साल से मैंने भी नहीं है.. राजेश अमेरिका में रहता है आज राजेश का फोन आया, कहता है उसे मुझसे तलाक़ चाहिए। मैंने सोचा कि ऐसी सेक्सी की बीवी जिसके पास हो और वो छोड़ना चाहता हो उससे बड़ा पागल धरती पर नहीं होगा। मैंने पूछा- क्यूँ..?

मधु बोली- शादी के 5 महीने के बाद राजेश मुझे यहाँ अकेला छोड़ के चला गया, और सुनने में आया है कि वहाँ राजेश की एक और बीवी है। मैं चुप था क्यूँकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोलूँ.. अचानक मधु और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूँ… तो मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और मधु जी भर कर रोती रही। कुछ देर बाद मधु ने रोना बंद किया पर मेरी बाहों में ही पड़ी रही। फिर मुझे लगा कि मधु की साँसें जोर ज़ोर से चल रहीं हैं.. मैं उठने लगा तो मधु बोली- मुझे छोड़ के मत जाओ, मुझे अपनी बाहों में ही रहने दो। और मधु ने मुझे और ज़ोर से पकड़ लिया और मेरे साथ चुम्बन करने लगी.. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करूँ फ़िर भी मुझे लगा कि इस हालत में यह सब गलत है तो मैं बेड से उठ कर जाने लगा। मैंने मधु से कहा- ये सब सही नहीं है..

तो मधु बोली- तुम तो मेरी मदद करने आए थे? अब क्या हुआ कि छोड़ के जा रहे हो.. अगर तुम एक औरत को उसकी ज़िंदगी में सुख  नहीं दे सकते तो तुम ज़िंदगी में करोगे क्या? मैं यह नहीं कह रही कि तुम मुझे ज़िंदगी भर सहारा दो, पर दो पल की खुशी तो दे ही सकते हो.. मैं यह सुन रहा था फिर मुझे  ऐसा लगा कि किसी ने मेरे मरदानगी को ललकारा हो.. मैंने मधु से कहा- अगर तुम यही चाहती हो तो यही सही.. फिर में मधु के पास गया और उसके होठों को अपने होठों से मिला लिया और लगभग 15  मिनट तक हम एक दूसरे को किस्स करते रहे। फिर मधु ने मेरे शर्ट को उतारा और मेरे सीने पर सिर रख कर बोली- तुम भी बहुत चाहते हो ना मुझे.. मैंने भी यह बात नोटिस की है, पर मैं तुम पर बोझ नहीं बन सकती..

मैंने कुछ नहीं कहा.. सोचता रहा कि काश की में कोई नौकरी करता तो मैं आज ही मधु से शादी कर लेता। खैर हम दोनों अब गरम हो चुके थे.. मैंने मधु की साड़ी उतार दी, अब मधु सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी.. क्या लग रही थी… ऐसा लग रहा था कि स्वर्ग से कोई अप्सरा उतर आई हो। मैंने उसके पूरे शरीर को किस्स किया और फिर उसका ब्लाउज़ और पेटीकोट उतार दिया। उसने लाल रंग की ब्रा और पिंक रंग की पेंटी पहन रखी थी.. मैं मधु के शरीर को देख के पागल होता जा रहा था, मधु क्या लग रही थी, इसे शब्दों में बयान करना इतना आसान नहीं है.. मैंने प्यार से मधु की ब्रा खोली और मधु के बूब्स को चूसने लगा, काफ़ी देर मिल्क पीता रहा.. कभी दबाता कभी मसलता और कभी उन्हें प्यार से होंठों से छू कर किस्स  करता। अब मधु भी पागल होती जा रही थी..

मधु की तेज साँसें पूरे कमरे में सुनाई दे रही थी। फिर मैंने मधु के पूरे शरीर को प्यार से किश किया। मधु  बोली- जानू तुम इतने दिन से दूर क्यूँ थे.. इस दिन के लिए मैं बहुत तड़पी हूँ.. एक साल होने को आया है और मुझे ये दिन नसीब नहीं हुआ और आज जब हुआ है तो ऐसा लग रहा है कि मैं जन्नत में हूँ.. मैंने कहा- बस आज से तुम्हारे तड़प के दिन ख़त्म.. अब मैं आ गया हूँ ना.. फिर मधु ने मेरा जीन्स और अंडरवीयर उतार दिया और मेरा लंड हाथ में लेकर हिलाते हुए बोली- वाओ यह तो बहुत बड़ा है.. मुझे इसे चूसना है.. मैंने कहा- अब यह तुम्हारा है, जो करना है करो.. इतना सुनते ही मधु ने उसे चूसना शुरू कर दिया और 15 मिनट मेरा लण्ड चूसा, उसके साथ खेली और पता नहीं क्या क्या किया..

फिर मधु बोली- जानू अब तड़पाओ मत.. एक साल से तड़प रही इस चूत को लंड दे दो.. मैंने मधु की पेंटी उतारी और बोला- अब मुझे भी तुम्हारी चूत के साथ खेलना है। तो मधु बोली- इसमें पूछने की क्या बात है, जो करना है, करो और इसकी प्यास बुझा दो।  मैंने मधु की चूत को चाटना शुरू किया और लगभग 15 मिनट तक कभी जीभ से कभी उंगली से.. मधु  बोली- मैं झड़ने वाली हूँ… और मधु का पानी निकल गया.. और बिस्तर गीला कर दिया मधु के पानी ने.. मेरा लंड अब उसकी चूत में जाने को बेताब था और शायद मधु की चूत भी बेताब थी मेरा लंड मेरे को.. मधु  बोली- मेरे राजा, अब मत परेशान करो ना, अब डाल भी दो ना… मैंने उसे प्यार से लिटाया और उसके पैर फैला दिए और धीरे से लंड डालने लगा।

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मेरा लंड 7″ लम्बा और 3″ मोटा था  इस लिए मधु की छूट में जाने का नाम नहीं ले रहा था.. और मधु की चुत बहुत टाइट चूत थी.. होती भी क्यूँ ना… एक साल से तड़प रही थी बेचारी.. मैंने ज़ोर लगाया और आख़िर अंदर चला ही गया.. मधु चिल्ला पड़ी… मधु की आखो में आँसू आ गये. मधु बोली बोली- धीरे धीरे करो, दर्द हो रहा है। मैं कहाँ मानने वाला था.. मैं लगा रहा। थोड़ी देर बाद मधु भी साथ देने लगी गांड उठा उठा के.. आह आहह आहह और फच्च फच्च की आवाज़ों से पूरा कमरा गूँज उठा। फिर मैंने मधु को उल्टा कर दिया और कुत्ते की  स्टाइल में हम बहुत देर तक करते रहे… फिर मधु मेरे उपर आ गई और क्रॉस पोज़िशन में करती रही.. इतने टाइम में मधु 3 बार झड़ चुकी थी और बहुत थक गई थी..

फिर हम वापस मिशनरी पोज़िशन में आ गये और अब झड़ने की बारी मेरी थी.. मैंने कहा- कहाँ निकालूँ? मधु बोली- अंदर ही गिरा दो… बहुत प्यासी है मेरी चूत.. मैंने अपना गर्म लावा उसके अंदर ही गिरा दिया.. और काफ़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे.. फिर हमने शावर लिया साथ साथ और एक बार फिर मधु की चुदाई की… उस दिन मैंने चार बार मधु की चुदाई की। रात को मधु बोली- तुमने मुझे आज ज़िंदगी में बहुत बड़ी खुशी दी है जिसके लिए मैं कब से तड़प रही थी.. वादा करो कि तुम हमेशा मुझे ऐसे ही खुशी देते रहोगे.. और मेरी जैसी और भी ज़रूरतमंद औरतों और लड़कियो को ज़िंदगी की खुशी देते रहोगे..

मैंने मधु से वादा किया। और तबसे आज तक मैं यही करता आ रहा हूँ। उसके बाद हमें जब भी मौका मिलता, हम जबरदस्त चुदाई करते और एक दूसरे की बाहों में खो जाते! कुछ समय बाद मधु  चली गई और पता चला कि उसका तलाक़ हो गया है और मधु के घर वालों ने उसकी दूसरी शादी तय कर दी है। एक दिन मेरी उससे बात बात हुई तो मधु बोली- अब मैं बहुत खुश हूँ, मेरे पति मुझे बहुत खुश रखते हैं पर मैं तुम्हारे साथ बिताए पलों को ज़िंदगी भर संभाल कर रखूँगी और कभी नहीं भूल पाऊँगी.. दोस्तो, इस घटना के बाद मुझे एहसास हुआ कि अगर आप किसी को दो पल की खुशी दे सकते हो तो वो दो पल काफ़ी हैं आपके वक़्त के लिए धन्यवाद..

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