पड़ोसन आंटी की चूत फाड़ दी

राम राम दोस्तो, कैसे हो आप सब लोग…दोस्तों मैं अर्जुन इलहाबाद से हूँ.. और आज में एक स्टोरी लेके हाजिर हु आप के सामने दोस्तों यह स्टोरी एक आंटी की है जो मेरे पड़ोस में रहती है दोस्तों में आप को मेरे बारे में थोड़ा बता देता हु मेरा रंग गोरा है.. मेरा कद 5 फ़ीट 5 इंच है.. मेरा शरीर थोड़ा दुबला-पतला है। लेकिन कहा जाता है की जो आदमी जितना लम्बा होता है उसका लैंड भी लम्बा होता है दोस्तों मेरा लण्ड 6.5 इंच लम्बा और 2.5 इंच मोटा है जो कि खड़ा होने पर चड्डी में टेंट की तरह दिखता है। दोस्तों यह मेरी पहली स्टोरी है और उम्मीद करता हूँ कि आप सबको पसन्द आएगी। ये कहानी आज से 2 वर्ष पहले की है.. जब मेरी ऐज 23 वर्ष थी। उस टाइम मैं अपने गाँव गया हुआ था। मेरा गाँव इलहाबाद से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। और उन दिनों कड़ाके की ठण्ड का मौसम था।

जैसा की में आप को आंटी के बारे में कहा था तो में अब आप को उनका फिगर बताता हु  दोस्तों आंटी का नाम अवंतिका था। अवंतिका आंटी की उसी साल शादी हई थी.. अवंतिका को कोई बच्चा नहीं हुआ था। अवंतिका का रंग एकदम साफ दूध जैसा था कद 5 फ़ीट और बॉडी का कटाव 34 के बूब्स -30 की कमर -36 की गांड थी। जब अवंतिका आंटी मेकअप करके निकलती थीं तो अवंतिका ऐसी लगती थी जैसे स्वर्ग स्वयं मेनका आई हो। अवंतिका आंटी जब चलती थी तो अवंतिका की बड़ी मस्त चाल से उसके बूब्स और गांड बहुत ही मस्त हिलती थी। अवंतिका आंटी का घर मेरे अंकल के घर के पीछे की तरफ था। हमारी छत से अवंतिका के घर की छत साफ दिखती थी और अवंतिका आंटी छत पर ही बने एक रूम में रहती थीं। मेरे गाँव जाने के दूसरे दिन ही काफ़ी ठंडी होने की वजह से करीब 8 बजे सुबह छत पर धूप में बैठा था.. तो अचानक मेरी नज़र अवंतिका आंटी की छत पर गई।

मैंने पहली बार अवंतिका को नहा कर कपड़े चेंज करते हुए देखा। अवंतिका को इस हालत में देखते ही मेरे होश उड़ गए और मैं अवंतिका को देखता ही रह गया। मैंने आज तक इतना खूबसूरत और कामुक आइटम कभी नहीं देखा था.. अवंतिका मानो जन्नत से आई हो… मेरा मन अब अवंतिका पर डोल गया.. अवंतिका की एक बार चुदाई के बदले में जान भी दे दू .. आप सब मेरी बात को झूठ माँनेंगे.. लेकिन ये सच है। दोस्तों अवंतिका के बाथरूम में दरवाजा नहीं था.. इसलिए अवंतिका खटिया लगा कर नहा रही थीं। जैसे ही अवंतिका बाथरूम से बाहर आईं.. तो अवंतिका ने मुझे उनको देखते हुए देख लिया और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए, जल्दी से चली गईं। फिर मैं भी उठा और नीचे बाथरूम में जाकर उनके नंगे बदन को याद करके दो बार मुठ मारी। दोस्तों अब तो मेरे अंदर अवंतिका के प्रति इतनी हवस पैदा हो गई की मैं बस एक बार अवंतिका को चोदने की सोचने लगा। और पुरे दिन बस यही बात बार-बार दिमाग में घूम रही थी और अवंतिका को देखने के बाद तो मेरा लोडा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

अवंतिका के घर हमारे परिवार का आना-जाना अच्छा था। अब मैं अवंतिका के घर किसी न किसी बहाने से जाता और अवंतिका से बात करने की कोशिश करता.. लेकिन बात नहीं हो पाती थी। दोस्तों एक दिन ऐसा हुआ की मानो मेरी किस्मत ही पलट गई समजो की .. जैसे कि अंधे को आँखें मिल गई हों। हुआ यु की अवंतिका आंटी ने मुझे बुलाया तो मैं अवंतिका के पास गया.. अवंतिका ने उस दिन एक सादा लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी.. अवंतिका उस साड़ी में मेरे लण्ड पर क़यामत ढा रही थीं। दोस्तों में अवंतिका के घर जाकर देखा तो घर में कोई नहीं था। फिर तो मेरे मन में उसी वक्त अवंतिका आंटी को चोदने की इच्छा होने लगी, मुझे अपना लण्ड संभालना बड़ा मुश्किल हो रहा था। जैसा कि मैंने आप सभी को बताया था कि मेरा लण्ड 6.5 इंच लम्बा और मोटा भी है जो कि खड़ा होने पर चड्डी में अलग ही दिखता है.. वो उस दिन भी दिख रहा था। मैंने अवंतिका आंटी के पास जाकर अवंतिका से पूछा- आंटी क्या काम है?

अवंतिका ने मुझे राकेश अंकल को फ़ोन करने के लिए बुलाया था। तो मेने अवंतिका आंटी को अपना फ़ोन दे दिया और अवंतिका आंटी ने राकेश अंकल को फ़ोन किया.. तब तक मैं अवंतिका के कमरे में पड़े खटिए पर बैठ गया और अवंतिका आंटी को देख-देख कर अपने लण्ड के उपहार हाथ घुमाने लगा। अवंतिका आंटी मुझे अपना लण्ड सहलाते हुए देख रही थीं। अवंतिका का फ़ोन कट जाने के बाद मैंने अवंतिका से कहा- आंटी आप बहुत ही सुंदर हो.. आप के लिए तो कोई भी अपनी जान दे सकता है। अवंतिका यह सुनकर वो थोड़ा सा मुस्कुराईं और ‘चल हट..’ कह कर चुप हो गईं। अवंतिका ने अपने पर्स से पैसे निकाले और मुझे फ़ोन के बदले देने लगीं। मैंने मना कर दिया। अवंतिका आंटी बोली- क्यूँ नहीं ले रहे हो? तो मैं बोला- मुझे पैसे नहीं कुछ और चाहिए… अवंतिका बोली- क्या चाहिए बोलो? वो ही मिलेगा। अब तो मुझे अन्दर ही अन्दर डर लगने लगा। तो मैंने कहा आप नहीं दोगी.. झूठ बोल रही हो.. पहले आप वादा करो कि जो मैं माँगूगा.. वो आप दे दोगी।

दोस्तों फिर अवंतिका ने मुझसे वादा कर दिया और पूछने लगीं- क्या लोगे बताओ? अब मुझे बताने में बहुत डर लगने लगा कि कहीं चोदने की कहूँ तो ये मेरे घर पर न कह दे.. इसी डर से मैं कुछ नहीं बोला और आंटी को कहा ‘फिर किसी दिन मांग लूँगा..’ की कह कर घर आ गया। घर आते ही फिर बाथरूम में गया और अवंतिका आंटी के नाम से 1 बार मुठ मारी। उस दिन से रोजाना सुबह के वक्त मुझे छत पर बैठना और अवंतिका को नहाते हुए ही देखना और इसके बाद मुठ्ठ मारना.. यही काम चालू हो गया। ऐसा कई दिन तक चलता रहा। फिर मैंने एक दिन थोड़ी हिम्मत लगाई और अवंतिका से बात करने की मन में ठान ली कि मैं आज अपनी बात बता कर ही रहूँगा कि मैं आपको चोदना चाहता हूँ। तो उस दिन शाम को जब मुझे लगा कि उनके घर पर कोई नहीं है.. तो मैं अवंतिका के पति राकेश का नम्बर लेने के बहाने से अवंतिका के पास गया और मैंने जाकर देखा कि अवंतिका अपने बिस्तर पर लेटी थीं और टीवी पर कुछ देख रही थीं और अपनी चूत को सहला रही थीं।

तो मुझे अवंतिका को देख कर चुदाई का भूत सवार हो गया। अब मेरे लिए रुकना मुश्किल था और मैं अन्दर कमरे में चला गया। तो अवंतिका मुझे देख कर एकदम से डर गईं और अपने कपड़े सही करती हुई खड़ी हुईं। तो मैंने कहा- अरे अवंतिका आंटी आप बैठी रहो न… अवंतिका का मुँह ऊपर नहीं हो रहा था.. शर्म के मारे मेरे अवंतिका चुपचाप खड़ी रहीं। फिर मैंने अवंतिका का हाथ पकड़ा और बिस्तर पर बैठने को कहा और अवंतिका का हाथ पकड़ते ही मेरे शरीर में 440 वोल्ट का करेंट सा दौड़ गया और मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। फिर मैं अवंतिका को देखते हुए बोला- अवंतिका आंटी मैं आपसे कुछ लेने आया हूँ। अवंतिका बोली- बताओ क्या लेना है? मैंने कहा- आप मना तो नहीं करोगी.. आपने वादा किया था। अवंतिका ने कहा- ठीक है बताओ… तो मैंने कहा- आंटी… आप मुझे बहुत सेक्सी लगती हो.. मैं आपके साथ एक रात सोना चाहता हूँ। यह सुनकर अवंतिका चिल्ला उठी और बोली- तुमको पता है.. तुम क्या कह रहे हो?

मैंने धीरे से कहा- आपने वादा किया था कि आप मना नहीं करोगी… अवंतिका बोली- मैंने ऐसे नहीं कहा था और अब तुम जाओ यहाँ से। फिर अवंतिका से में धीरे से बोला- अवंतिका आंटी ये ग़लत बात है.. आप अपना प्रॉमिस तोड़ रही हो प्लीज़ एक रात की ही तो बात है… कुछ देर तक हिम्मत करके मैं उन्हें एक रात के लिए मनाता रहा तो अवंतिका आंटी ने काफ़ी देर तक चुप रहने के बाद कहा- ठीक है.. मैं सोच कर बताऊँगी। यह सुनते ही मैं मन ही मन में बहुत खुश होने लगा और अवंतिका को अपना नम्बर देकर अवंतिका से जल्दी जबाब देने की कह कर चला आया। अब तो मेरी जिन्दगी में बस दो ही काम बचे थे.. अवंतिका आंटी को हर वक्त देखने की कोशिश करते रहना और हर दो या तीन घन्टे बाद मुट्ठ मारना। फिर एक दिन सुबह 8 बजे मेरा फ़ोन बजा.. मैं अब तक सोया हुआ ही था तो मैं फोन उठाया और देखा कि फोन पर अवंतिका आंटी थीं.. अवंतिका की आवाज़ सुनते मेरा रोम-रोम खुश हो गया और ऐसा लगने लगा जैसे कि मुझे खजाना मिल गया हो…

फिर मैंने अवंतिका से पूछा- बताओ.. क्या बात है? तो अवंतिका ने कहा- मेरे सभी घर वाले सभी एक रात के लिए बाहर जा रहे हैं और तुम आज रात को ही आ जाना… यह कह कर अवंतिका ने फ़ोन रख दिया.. ये सुनते ही मुझे पता नहीं क्या हो गया और उसी पल से मुझे एक-एक सेकेंड बहुत बड़ा लगने लगा और रात के बारे में सोचने लगा। मेरा दिन गुजारना बहुत मुश्किल हो गया.. बस ऐसा लग रहा था कि कब रात हो और मैं उसे चोदूँ… फिर दोस्तों मैं रात होने का इन्तजार करने लगा और सोच-सोच कर मुठ मारने लगा। उस दिन मैंने दिन में करीब 4 बार मुठ मारी थी। फिर आखिरकार वो रात आ ही गई.. जब मैं पहली बार चूत के दर्शन करूँगा और किसी को चोदूँगा। फिर मैंने शाम का खाना खाया बस खाया ही था भूख किसे थी.. अब तो बस चूत की भूख थी। मैं और मेरे अंकल का लड़का मनीष छत पर ही सोते थे। मेरे अंकल का लड़का मुझसे काफी छोटा था, उसकी उम्र लगभग 10 साल थी।और फिर सबने खाना खाया और सब सोने चले गए। गाँव में सब जल्दी सो जाते हैं.. क्यूँकि सुबह जल्दी जाग जाते हैं। मैं भी जाकर खटिया पर लेट गया.. मुझे नींद कहाँ आने वाली थी।

जब करीब 9:30 बजे और मैंने देखा कि घर वाले सभी सो चुके हैं तो बाहर छत पर शाल ओढ़ कर आंटी के घर की तरफ मुँह करके बैठ गया और अवंतिका के बुलाने का इन्तजार करने लगा। दोस्तो, दिसंबर एंडिंग का महीना था.. बहुत कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी और मैं सर्दी लगने की वजह से काँप रहा था। फिर करीब आधा घंटे बाद अवंतिका आंटी ने टॉर्च जला कर मेरी तरफ इशारा करके बुलाया और फिर क्या था.. मैंने चुपके से अपना दरवाजा खोला ओर निकल गया। आंटी के पास पहुँचा तो जाकर देखा कि गेट के पास उनके ससुर सोए हुए थे.. तो आंटी ने मुझे टॉर्च जला कर घर के पीछे आने को कहा। उनके घर के पीछे से भी अन्दर जाने का रास्ता था। मैं पहुँचा फिर उन्होंने दीवार पर होकर ऊपर आने को कहा और मैं दीवार पर होकर ऊपर चढ़ गया। दीवार पर चढ़ते ही आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और धीरे से नीचे उतार कर अपने कमरे में ले गईं। अब तो दोस्तो, मुझे अजीब सी बेचैनी हो रही थी क्योंकि मैं किसी से इस प्रकार पहली बार मिल रहा था।

कमरे में अन्दर जाकर अवंतिका आंटी ने दरवाजा बंद किया और दीवार से लग कर खड़ी हो गईं और बोली- जो चाहते हो.. वो ले लो…
ये सुनते ही मैं पागल सा हो गया और अब मेरा सपना साकार होने वाला था। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ तो मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ा और दबाने लगा। हाथ पकड़ते ही मेरा लण्ड फुंफकार मारने लगा। फिर मैंने अवंतिका आंटी के कन्धों पर चुम्बन करके अवंतिका को मदहोश कर दिया.. उसके मुँह से सिर्फ़ ‘आह.. ओह.. हा.. हा..’ की सिसकारियाँ निकल रही थीं। मैंने अवंतिका की सदी निकाल कर फेंक दी और अवंतिका की मोसम्बियों को चूसने लगा। अवंतिका मेरा साथ दे रही थी.. मैंने अवंतिका का पेटीकोट उतारने के लिए पकड़ा उसने भी गाण्ड उठा कर मेरा साथ दिया और मैंने अवंतिका का पेटीकोट उतार फेंका। वो दिन मेरी जिंदगी का बहुत कीमती दिन था। जिसको अब अवंतिका  को देख कर मेरा लंड सलामी दे रहा था..अवंतिका आज नंगी मेरे सामने थी। मैंने अवंतिका की जाँघों को चूमा.. तो अवंतिका सिहर उठी… फिर मैंने अवंतिका की लाल कलर पैन्टी उतार दी।

हय.. मेरे सामने तो स्वर्ग की पारी नंगी खड़ी थी.. मैं तो जैसे सपना देख रहा था कि वो मेरे सामने नंगी खड़ी है। मैं उसको पागलों की तरह चूम-चाट रहा था.. वो भी मेरा साथ दे रही थी।  अब मैंने अवंतिका को उठा के पलंग पर लिटा के अवंतिका की टाँगें फैला दीं और अवंतिका की चूत के बिल्कुल सामने आ गया। क्या मस्त चूत थी अवंतिका की.. एकदम गुलाबी.. उसकी चूत पे एक भी बाल नहीं था.. शायद उसी दिन साफ़ की होगी। फिर मैंने अवंतिका की चूत के दाने पर जीभ रखी उसने फिर मेरे बाल पकड़ लिए। मैंने उसकी चूत के दाने को जीभ से चाटना शुरू किया अवंतिका सीत्कारियाँ ले रही थी। ‘आह ओह हहहहहहह.. आह.. उह हाय.. उह उफ़…’ उसके मुँह से नशीली आवाजे निकल रही थीं। हय.. क्या स्वाद था.. उसकी चूत का.. प्री-कम की बूँदों ने अवंतिका की जवान चूत का स्वाद.. मस्त मदहोश करने वाला बना दिया था। मैं पागलों की तरह उसकी चूत को चूसे जा रहा था और उसके चूचों को दबा रहा था।

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अब मेने अपना लंड अवंतिका की चूत के दाने पर रगड़ता रहा.. मैं उसको इस हद तक तड़पाना चाहता था ताकि अवंतिका खुद कहे कि अन्दर डालो… अवंतिका बस लंड के अन्दर जाने का इंतजार करते हुए सिसकारियां ले रही थी। अवंतिका के मुँह से ‘सी.. सी.. सी..उह..’ की आवाजें निकल रही थीं। तभी अवंतिका के सब्र का बाँध टूटा और अवंतिका ने बोला- माधरचोद अब अंदर दाल दे क्यों तड़फा रहे हो… मुझे तो इसी पल का इंतजार था.. मैंने उसकी चूत के होंठों पर अपने लंड का सुपारा लगाया और झटके से अन्दर करने की कोशिश की.. अवंतिका की चीख निकल गई।  मैंने अब अपना लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया.. फिर उसके होंठों पर चुम्बन करते हुए अचानक ही मैंने एक और ज़ोर का झटका मारा और इस बार मेरा लंड आधे से ज्यादा उसकी चूत में घुस गया था। मेरे होंठ उसके होंठों पर चिपके होने के कारण अवंतिका चीख नहीं पाई.. बस सर इधर-उधर करके दर्द को सहती रही। मैंने अवंतिका के बूब्स को चूस-चूस कर उसको मजा दिया ताकि उसका दर्द कम हो जाए।

थोड़ी देर बाद होंठों और बूब्स की चुसाई के बाद उसका दर्द कम होने पर.. फिर अवंतिका गाण्ड हिला-हिला कर मेरा साथ देने लगी और मैंने फिर उतना ही लंड आगे-पीछे करना शुरू किया। अब उसको बहुत मजा आ रहा था.. अवंतिका अपनी कमर उठा-उठा कर लंड को अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी। अब मैं धीरे-धीरे लंड अवंतिका की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। अवंतिका के मुँह से ‘सी सी..सीईईई.. आहह आहह.. उहह..’ निकल रहा था। मैंने अपनी रफ़्तार थोड़ी बढ़ाई रिंकू को और मजा आने लगा।अब अवंतिका के मुँह से निकल रहा था ‘चोदो और चोदो.. ज़ोर से.. और ज़ोर से चोदो.. फाड़ दे मेरी चूत को..’ उसके मुँह से यह सब सुनकर मैं हैरान था। मैं और रफ़्तार से अवंतिका को चोदने लगा और साथ ही उसके बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा। उसके मुँह से ‘आ.. आहह ओह हा हा और चोदो.. और चोदो.. फाड़ दो मेरी चुत को आज तुम और ज़ोर से.. हाँ हाँ.. और ज़ोर से..’ निकल रहा था।

अवंतिका की आवाज़ में तेज़ी आ गई और एक बार फिर उसका शरीर अकड़ने लगा और अवंतिका झड़ गई। उसने मुझे कस कर गले से लगा लिया पर मेरे लंड का काम नीचे चालू था.. अवंतिका की चूत को चोदे जा रहा था। कुल आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं भी झड़ने की कगार पर था। मैंने अवंतिका को पूछा- अन्दर छोड़ दूँ क्या? उसने कहा- मुझे तुम्हारे लंड का पानी पीना है। मैंने लंड अवंतिका की चूत से बाहर निकाला और अवंतिका के मुँह में डाल कर अवंतिका के मुँह के अन्दर ही माल छोड़ने की तैयारी में था। मैं अभी भी उसके बूब्स को दबा रहा था। फिर मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं अवंतिका के मुँह मे झड़ गया। उसके बाद हम दोनों लिपट गए और निढाल होकर चिपक कर लेट गए। उस रात हमने 5 बार चुदाई की और उसके बाद अब जब भी मौका मिलता है.. हम दोनों खुल कर चुदाई करते हैं।

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