नूतन भाभी की मेरा मोटा लण्ड लिया

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम विष्णु है में जैसलमेर का रहने वाला हु दोस्तों  मेरी और मेरी भाभी की है जो बहुत इंटरेस्टिंग है मेरी भाभी का नाम नूतन है दोस्तों मेरी उम्र 25 साल है और में करीबन 8 साल से मुठ मर रहा हु इस लिए मेरे लण्ड का साइज 7.5 ” है और मोटाई 3 इंच है  दोस्तों ये कहानी मेरे बुवाजी के लड़के की औरत की है मतलब वो मेरी भाभी हुई। दोस्तों यह बात कुछ दिनों पहले की है जब में अपने बुवाजी के घर गया था। मेरा और भूया जी का घर पास पास ही है दूसरे दिन जब में उठा नास्ता किया फिर नहाया और तैयार हो गया और एक तरफ भाभी जी नहाई और कमरे में चली गई और ये मुझे पता नहीं था तो में नूतन भाभी से मिलने चला गया। आगे जाके मेने देखा तो मेरी आखे खुली की खुली रह गई में क्यों की नूतन भाभी ने ब्रा पहनी हुई थी और निचे पेटीकोट पहना हुआ था और वो अब साड़ी पहन रही थी इतने में नूतन भाभी ने मुझे देख लिया और मुझे देखकर वे मेरी तरफ पीठ करके घूम गईं और बोलीं- दरवाजा नॉक करके तो आया करो.. मेरे प्यारे देवर जी! इस पर मैं बोल उठा- भाभी के कमरे में आने के लिए नॉक करने की क्या जरूरत है?

यह बोलकर मेरी नज़र नूतन भाभी के जिस्म पर पड़ी और मैं तो नूतन भाभी का जिस्म देखते हुए बाहर को निकल गया। हाय.. क्या मस्त सेक्सी जिस्म था नूतन भाभी का.. आपको बता दूँ कि मेरी भाभी का जिस्म एकदम परी जैसा है.. उनके बड़े बड़े  बूब्स नशीली आँखें.. सेक्सी लाल होंठ.. थोड़ी देर के बाद मैं अन्दर आया तो नूतन भाभी ने सेक्सी अदा से पूछा- इतनी देर तक क्या देख रहे थे? तो मैं डर गया और बोलने लगा- कुछ नहीं.. मैं तो आपके कहते ही बाहर चला गया था। नूतन भाभी बोलीं- ज्यादा भोले मत बनो.. मैं जानती हूँ.. तुम्हारे और पड़ोस वाली संजना के बारे में क्या चलता है। इस बात पर मैं कुछ नहीं बोल पाया। नूतन भाभी ने फिर से पूछा- बताओ न.. क्या देख रहे थे? तो मैं बोला- आपकी जवानी को.. क्या फिगर है आपका नूतन भाभी.. रोहित भैया तो कदर ही नहीं करते हैं आपकी..

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इस पर नूतन भाभी रोने लग गईं और बोलीं- तू सही बोल रहा है.. तेरे रोहित भैया तो मुझे छूते ही नहीं हैं एक-एक महीना हो जाता है, ‘वो’ सब करे बगैर.. उनका तो पता नहीं.. पर मैं कहाँ जाऊँ.. इसके लिए तू ही बता विष्णु .. मैं क्या करूँ? मैं नूतन भाभी को चुप कराने लग गया और बोला- भाभी यही तो जिन्दगी की कड़वाहट है। इसी तरह कुछ देर तक बात होती रहीं.. फिर थोड़ी देर बाद मुझे पापा का फ़ोन आया और मैं चला गया। मुझे मालूम हो गया था कि भाभी जी रोहित भैया से संतुस्ट नहीं है , नूतन भाभी की प्यासी चुदासी चूत चुदने के लिए कुलबुला रही है। कुछ ही समय के बाद एक दिन रोहित भैया काम से बाहर गए हुए थे और बच्चे भी मेरे बड़े रोहित भैया के साथ गए हुए थे.. घर पर सिर्फ फूफाजी.. बुआजी और नूतन भाभी रह गए थे। बुआजी ने बोला- आज रात तू भाभी के कमरे में सो जा . अंधे क्या चहिए.. दो आँखें.. मैंने ‘हाँ’ कर दी।

मैं रात को घर पर पापा को बोलकर बुआजी के घर आ गया और नूतन भाभी के कमरे में आ कर लेट गया। थोड़ी देर बाद नूतन भाभी भी अपने कमरे में खाना खाकर आ गईं और कमरे में मेरी तरफ पीठ करके लेट गईं। मैं भी थोड़ी देर लेटा रहा। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि नूतन भाभी सो गई हैं.. तो मैं भी सोने का नाटक करते हुए नूतन भाभी के पास आ गया और धीरे से मैंने अपना हाथ भाभी के पेट पर रख दिया। इस पर नूतन भाभी की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं हुआ.. तो मैंने अपना हाथ नूतन भाभी के पेट पर गुमाना चालू कर दिया। इस बार भाभी के बॉडी में थोड़ी हलचल हुई और वो सीधे हो कर लेट गईं। फिर मैं धीरे-धीरे अपना हाथ भाभी के मम्मों पर लाया और उन्हें ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना चालू कर दिया।

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उनका किसी भी तरह का प्रतिरोध न होना मेरे हरी झंडी सा था। इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने भाभी के ब्लाउज के हुक खोलना चालू किए.. कुछ ही पलों में उनका ब्लाउज पूरा खोल दिया। भाभी ने नीचे ब्रा नहीं पहन रखी थी। मैं धीरे-धीरे उनके मस्त बूब्स  को दबाने लग गया। मुझे अहसास था कि भाभी जगी हुई हैं और सोने का नाटक कर रही हैं.. पर मैं तो बूब्स को दबाने में खोया हुआ था। थोड़ी देर बाद मैंने भाभी की साड़ी पेटीकोट के साथ धीरे-धीरे ऊपर को सरकाई। इस पर भाभी की संगमरमर सी जांघें नंगी होकर दिखाई देने लगीं। मैंने देखा भाभी ने पैन्टी भी नहीं पहनी हुई थी। उनकी चूत को देखने पर ऐसा लगा जैसे भाभी ने अपनी चूत को कुछ दिनों पहले ही साफ़ किया हो। मैंने अपनी एक ऊँगली भाभी की चूत के ऊपरी भाग पर धीरे से रगड़ी। चूत में लिसलिसापन महसूस होते ही मुझे लगा कि नूतन भाभी सच में सोने का नाटक कर रही हैं।

मैं नूतन भाभी की चूत के ऊपर के भाग को दो उंगलियों के बीच में रखकर रगड़ने लगा। इस बार नूतन भाभी के मुँह से सिसकारी छूट गई। मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं नूतन भाभी के होंठों को अपने होंठों के बीच में लेकर उनका रस पीने लग गया। थोड़ी देर बाद नूतन भाभी भी मेरा साथ देने लगीं। हम काफी देर तक एक-दूसरे को चूमते रहे। जब हम अलग हुए तो नूतन भाभी बोलीं- मुझे पता था कि तुम्हारी नज़र मेरे ऊपर काफी दिनों से है.. और आज रात तुम मेरे साथ सेक्स करने की कोशिश करोगे। मेरी नज़र भी तुम पर थी… पर कभी मौका नहीं मिल पाया।

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इस बात पर मैंने नूतन भाभी के मम्मों जोरों से दबा दिए तो भाभी बोलीं- धीरे देवर जी.. अब तो ये तुम्हारे ही आम हैं। मैंने नूतन भाभी के सारे कपड़े खोल दिए और अपने भी खोल दिए। नूतन भाभी मेरा लंड देखकर बोलीं- इतना मस्त लंड.. देवर जी कहाँ छुपा कर रखा था? नूतन भाभी ने मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लग गईं.. मैं मस्त होने लगा। थोड़ी देर बाद जब नूतन भाभी ने लंड चूसना बंद किया.. तो मैं नूतन भाभी की दोनों टांगों के बीच में आकर उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लग गया।

इस हरकत से नूतन भाभी मस्त होने लगीं और ‘ऊह.. आह..’ की आवाज़ निकालने लग गईं.. जो पूरे कमरे में गूंजने लगी। थोड़ी देर बाद भाभी बोलीं- अब मत तड़पाओ.. डाल दो मेरी चूत में.. तुम्हारा लंड.. मैंने भी देरी नहीं की.. भाभी को अपने ऊपर लेकर धीरे-धीरे अपना लंड भाभी की चूत में डाल दिया। नूतन भाभी हल्का से उछलीं.. पर पूरे लंड को अपनी चूत में ले लिया। फिर वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं और ‘ऊह.. आह..’ की आवाजें निकालने लगीं। थोड़ी देर के बाद मैंने नूतन भाभी को अपने ऊपर से हटाया और उन्हें लंड की तरफ इशारा किया। वो ये इशारा समझ गईं और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लग गईं। फिर मैंने भाभी को लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया।

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नूतन भाभी को मज़ा आ रहा था.. वो कहने लगीं- पांच साल में तेरे बड़े भैया ने इतने मज़े नहीं दिए.. जितने छोटे ने एक रात में दिए हैं। मैं नूतन भाभी को पूरी ताकत से ऐसे ही चोदता रहा.. थोड़ी देर में नूतन भाभी की बॉडी अकड़ गई.. और वो बोलीं- मेरा निकलने वाला है.. इस पर मैंने झटके और जोर से मारने चालू कर दिए। थोड़ी देर में नूतन भाभी का पानी निकल गया.. पर मैं अभी भी चार्ज था। नूतन भाभी बोलीं- मुझ से तुम्हारा लंड अब चूत में सहा नहीं जा रहा है.. इस पर मैंने बोला- ठीक है.. मैंने अपना अपना लंड बाहर निकाला और नूतन भाभी के मुँह में डाल दिया। नूतन भाभी लंड को फिर से चूसने लग गईं। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड भाभी की बड़े-बड़े मम्मों के बीच में लगा दिया और नूतन भाभी से बोला- भाभी.. अपने दोनों बोबों को कस कर पकड़ लो।

वे समझ गई कि अब दूध चुदाई होना है.. फिर मैंने अपने लंड को मम्मों के बीच में आगे-पीछे करने लग गया। थोड़ी देर के बाद मेरा भी निकल गया और मैं नूतन भाभी के ऊपर ही निढाल हो गया। हम काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। थोड़ी देर बाद नूतन भाभी मेरा लंड फिर सहलाने लग गईं और वो फिर खड़ा हो गया। नूतन भाभी भी फिर से चार्ज हो गईं और हमने फिर से अपनी चुदाई लीला शुरु कर दी। उस रात मैंने नूतन भाभी को तीन बार चोदा। चुदाई के बाद हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे के साथ चिपक कर सो गए। इस सबके बाद नूतन भाभी ने अपनी किराएदारनी को भी मुझसे चुदवाया।

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