तलाकशुदा की चूत की प्यास

नमस्कार मित्रो मेरा नाम गौरव है में कोलकाता का रहना वाला हूँ। मेरी उम्र अभी 26 चल रही है। में दिखने में बहुत हेंडसम हु दोस्तों में जब भी किसी सेक्सी लड़की आंटी या भाभी को देखता हु तो मेरा 7 इंच का लण्ड उनको सलामी देने लग जाता है। दोस्तों अब में अपनी कहानी पर आता हूँ दोस्तों  यह बात 2014 की है.. जब मेरी मुलाकात एक मोटी गाण्ड वाली और भरी हुए बूब्स वाली एक तलाकशुदा महिला से हुई।
तब मैं एक दुकान कोलकाता में काम करता था। मेरी उनके साथ एक मुलाकात हुई उस दिन वो सच में पीले सूट में बहुत ही सेक्सी लग रही थी… उनका छोटा बेटा स्टोर में उनसे बिछड़ गया था। आख़िरकार उन्होंने खुश होकर मुझे मिलने के लिए अपने घर पर बुलाया था। उनका नाम संगीता और वो बहुत खूबसूरत बदन की अफसरा थी। संगीता के दो बच्चे थे.. और वो काफ़ी धनाड्य थी। जब मैं संगीता के घर गया.. तो संगीता ने काफ़ी खुले से कपड़े पहने हुए थे और संगीता उसमें बहुत सेक्सी लग रही थी।

उसके बाद मुझे संगीता से मिले हुए 2 महीने हो गए थे। एक दिन संगीता का फोन आया और बताया- मैंने नया घर बनवाया है.. तो उसकी खुशी में एक माता की चौकी का कार्यक्रम रखा है.. आप सपरिवार आइएगा। मैं अपने परिवार के साथ संगीता के वहाँ गया, वो एक बहुत ही सुंदर सी साड़ी में थी। उस दिन संगीता के बूब्स को कई बार मैंने अपनी कोहनी से टच किया और कई बार तो बहुत जोर से दबाते हुए भी कुहनी मारी… संगीता मेरे नियत समझ गई.. अंत में संगीता ने मुझे घर दिखाने के बहाने एक रूम में बुलाया और मेरे रूम आते ही किवाड़ बन्द करके लाइट भी बंद कर दी। मैं अभी मुंह खोले हुए सा संगीता को देख ही रहा था कि तभी संगीता ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने भी संगीता की मोटी-मोटी चूचियों को ज़ोर से अपनी छाती से दबाया दिया।

मेरा हाथ आटोमेटिक ही संगीता की गाण्ड पर चला गया और संगीता की पिछाड़ी को जोर से भींच कर मसक दिया। संगीता की कामाग्नि को समझते हुए मैंने उसके बाद संगीता के गहरे गले वाले ब्लाउज में अपना हाथ घुसेड़ दिया.. जिस पर संगीता एकदम से ‘आऊउच’ कर बैठी और प्यारी सी कामुक आवाज़ निकाल कर कहा- आह.. क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा- मैं वही कर रहा हूँ जो मुझे एक हसीन सेक्सी औरत के साथ करना चाहिए। संगीता ने कहा- मैं तो अब तलाकशुदा हूँ.. मैंने संगीता की बूब्स को चूम लिया और सच कह रहा हूँ उस हसीन माल के साथ वो क्या नज़ारा था.. वाउ.. मेरा दिल झूम रहा था हालांकि मुझे डर था कि कोई आ ना ज़ाए इसलिए हम अलग हो गए। संगीता ने अपनी साड़ी ठीक की और हम वहाँ से वापस हाल में आ गए।

मेरी और संगीता की व्यस्तताओं के चलते फिर करीब 4 महीने बाद वापिस उससे कांटेक्ट हुआ तो पता लगा कि संगीता का ऑपरेशन हुआ है। मैं वहाँ उनके घर के पास मिलने गया.. तो संगीता अपने हाउस पर ही थी और सचमुच खटिया पर थी। काफ़ी देर तक उसके पास बैठने के बाद मैंने संगीता से आज पहली बार खुल के बात की। संगीता ने पूछा- क्या मेरी कोई गर्ल-फ्रेंड है.. या नहीं..? मेरा उत्तर ‘नहीं’ में था। फिर संगीता ने आँख मारते हुए मुझसे पूछा- तुम्हें मुझमें सबसे अधिक क्या अच्छा लगता है? ‘तुम्हारे बूब्स मुझे बहुत पसंद हैं..’ मेरा बेलाग जबाव था। तो उसने भी बिंदास कहा- आज मेरी चुदाई करने की इच्छा है.. तो तुम मेरे साथ कर सकते हो। संगीता की हालत को देखते हुए मैंने सोचा कि अभी तो चुदाई हो नहीं पाएगी पर तब भी मैं उठा और संगीता के खटिया पर बैठ गया। मेरे खटिया पर बैठते ही.. संगीता मेरी गोद में सर रख कर चित्त लेट गई।

उस के बाद मैंने संगीता का सर सहलाना शुरू किया। पता नहीं क्या हुआ.. उसके मुलायम और हसीन जिस्म ने मुझे संगीता का दीवाना बना दिया। मैंने उसके क्लीवेज के ऊपर गर्दन के आस-पास और संगीता की छातियों पर हाथ फेरना शुरू किया। संगीता उत्तेजित तो हो चुकी थी.. मगर कुछ किए सिर्फ सिसकार रही थी। इस हालत में भी संगीता मेरे स्पर्श को एंजाय कर रही थी। मस्ती में मेरी ओर देखते हुए संगीता ने मुझसे पूछा- छुआ क्यूँ मुझे..? मैंने संगीता को जवाब में कहा- आई लव यू.. संगीता मुझे बहुत ही प्रेम से निहारने लगी और मुझसे जोर से चिपक गई.. मुझे खुद भी होश नहीं था कि हम लोग न जाने कितनी देर तक आलिंगनबद्ध रहे। इसके बाद संगीता मुझसे अलग हुई और उसने अपने ब्लाउज के दो बटन खोल दिए.. जिससे संगीता के सफ़ेद रंग लिए कठोर बूब्स अपनी छटा बिखरने लगे।

मैंने संगीता के बूब्स को चूम लिया और फिर धीरे से मैंने संगीता के ब्लाउज को पूरा खोल दिया। ज्यों ही उसके ब्लाउज के हटने के बाद उसके बूब्स मेरी तरफ को उछले.. मैंने उन 36 इंच के दोनों बूब्स को अपने हाथों से पकड़ लिया और अपने होंठों को उसके चूचियों को चचोरने लगा। संगीता मस्त हो उठी थी और सीत्कार भरने लगी। हम दोनों ही सेक्स की अंतिम सिमा पर में उड़ रहे थे। मैंने बहुत ही वहशियाना अंदाज से संगीता की चूचियों का मर्दन किया। संगीता बड़बड़ा रही थी- आह.. मेरी जान गौरव.. पिछले चार सालों से इस सुख के लिए मैं तड़फ रही थी..आह लव मी… चूंकि संगीता की इस हालत में इससे अधिक कुछ नहीं हो सकता था सो मैं भी बस ऊपर से प्यार करने की स्थिति में था। संगीता ने मुझसे कहा- गौरव मुझे सहारा दो प्लीज़ मुझे बाथरूम जाना है.. मैं समझ गया कि इसकी चूतड़ ने अपना सोम रस छोड़ दिया है और ये अपनी चूत धोने बाथरूम जाना चाहती है।

जैसा कि मेरा स्वभाव ही मदद करने का है मैंने संगीता को बड़े ही संभाल कर सहारा दिया और संगीता को बाथरूम तक लेकर गया और मैं बाथरूम के बाहर रुक गया.. तो संगीता ने मुझसे कहा- शर्माते क्यों हो.. मुझे तुम्हारा अन्दर तक साथ चाहिए। फिर मैं संगीता को बाथरूम के अन्दर तक लेकर गया। मैंने सकुचाते हुए दूसरी तरफ मुँह फेर लिया.. संगीता कमोड पर बैठ कर पेशाब करने लगी.. संगीता की चूत तो मुझे नहीं दिख रही थी.. पर उसकी पेशाब की ‘सुर्रर्रराहट’ सुनाई पड़ रही थी। मैं उसकी ‘सुर्रर्रराहट’ से ही बहुत उत्तेजित हो गया था। फिर संगीता ने मुझे धीरे से ‘गौरव …’ उसकी आवाज आई। मैंने पलट कर देखा.. संगीता ने भी मुझे देखा और अपनी बाँहें एक बार फिर मेरी तरफ बढ़ा दीं। मैंने संगीता को फिर से सहारा दिया और उसको वापस उसके खटिया तक ले आया। इसके बाद मैं संगीता के घर से चला आया।

अब जब कुछ दिनों के बाद दूसरी बार मैं संगीता से मिलने आया, तब शाम के 8 बज चुके थे.. संगीता कमरे में अकेली लेटी हुई थी और संगीता का बड़ा बेटा दूसरे कमरे में टीवी देख रहा था और छोटा बेटा सो रहा था। संगीता ने एक सुनहरे से रंग का सूट पहना हुआ था और ऊपर एक नेट वाला स्वेटर पहना था। मैंने थोड़ी देर बातें करके संगीता की बाँहों पर हल्के से मसाज करना शुरू किया।संगीता जानती थी कि मैं बॉडी-मसाज में एक्सपर्ट हूँ। मैंने धीरे-धीरे बाँहों से होते हुए संगीता के कुरते के अन्दर हाथ डाल कर उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और चुपचाप से अपने लंड को निकाल कर उसके हाथ में दे दिया। संगीता मेरे लवड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी। लंड ने अपना रूप संगीता के मन मुताबिक़ कर लिया, फिर उसने मेरे खड़े लौड़े को चूमा और मुँह में भर लिया। मुझे मजा आ गया। संगीता मेरे लंड को चूसते हुए मस्ती में थी और मैं उसके ठोस बूब्स दबा रहा था। वो मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी।

संगीता ने कहा- उसको इतना स्वादिष्ट लौड़ा आज तक नहीं मिला.. और अब से मैं सिर्फ़ तुम्हारे लंड को ही लूँगी। मैं मस्त हुआ पड़ा था और चुदाई का पूरा माहौल बन चुका था।संगीता ने मुझसे कहा- आज की रात तुम मेरे घर पर ही रहोगे।मैंने भी अपने घर पर फोन कर दिया कि आज रात में संगीता के घर पर ही रुकूँगा।दोनों लेट गए और एक-दूसरे से चिपका कर चूमने लगे और इस बार कोई रुकावट नहीं थी।संगीता के बाद तो हम चूमा-चाटी में कब हमारे कपड़े उतरना शुरू हो गए.. पता ही नहीं चला।मैंने संगीता के कुरते को एक ही झटके में उतार फेंका। आह्ह.. अन्दर उसके बूब्स को बहुत ही पतली सी लेस वाली ब्रा जकड़ने का असफल प्रयास करते हुई मिली.. जैसे मैंने एक ही झटके में अलग कर दिया और उसके गुलाबी निप्पलों को अपने मुँह में भर लिया। संगीता वास्तव में बहुत मुलायम ही त्वचा वाली एक बहुत ही कामुक चुदासी माल थी।

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संगीता आँखें बंद करके बोल रही थी- मैं बहुत लंबे समय से इस पल का इन्तजार कर रही थी.. प्लीज़.. गौरव मुझे अपने आगोश में ले लो.. आहह…मैंने दोनों बूब्स को अपने हाथ में लेकर दबाना शुरू किया और चूसने लगा। संगीता के चूचुकों को ऊँगलियों से मींजा।उसके बाद क्योंकि मेरे हाथ और मुँह बड़े हैं इसलिए उसके 36 इंच का बूब्स अपने मुँह में पूरा भर लिया और चूसना न कह कर.. कहूँगा कि खाने लगा…फिर मस्ती में आ चुकी संगीता के निपल्स को भी दाँतों से चुभलाने लगा।संगीता मेरे सर को पकड़ कर ‘ओह उहह और ज़ोर से गौरव…’ कहे जा रही थी।संगीता चुत इतनी गीली हो चुकी थी कि कैसे भी करके संगीता ने अपनी सलवार नीचे कर दी.. और साथ ही पैन्टी भी सरका दी।अब उसकी रसधार इतनी ज्यादा हो गई थी कि संगीता की जांघें पूरी गीली हो चुकी थी।

क्योंकि ऑपरेशन की वजह से संगीता अब भी ज़्यादा उठ नहीं सकती थी.. इसलिए इस सर्दी के मौसम में मैं भी नंगा होकर उनके मम्मों के बीच में अपने लंड को रख कर मस्त बूब्स की चुदाई की.. इसमें ही संगीता की चूत फिर से एक बार झड़ गई।संगीता अब हाँफने लगी थी।अभी भी मेरे लंड का पानी नहीं निकला था तो मैंने लौड़े को उसके मुँह में डाल दिया और संगीता मेरे लंड को और मेरे बड़े-बड़े अंडकोषों को चूसने लगी।फिर मैंने संगीता के बाल पकड़ कर लंड पूरा गले तक दे दिया और संगीता बड़े मज़े से चूसती रही। कुछ पलों के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने बोला- मेरा पानी छूटने वाला है।तो संगीता ने कहा- आने दो मेरे मुँह में.. तुमने मुझे इतना सुख दिया है.. मैं तुम्हारा क्रीमी माल पीना चाहती हूँ…मैंने अपना सैलाब उसके मुँह में छोड़ दिया।जिन्दगी में पहली बार मेरा माल किसी माल ने पिया था।

मुझे बहुत ही मजा आ रहा था शायद मुझे संगीता की चूत चोदने से भी बड़ा सुख मिला था।हमें मुख-चुदाई करते हुए 15 मिनट हो चुके थे, तब आखिर में मेरा पानी अपने मुँह में निकलवाने के बाद संगीता ने मेरे लंड के बॉल्स चूसे और लंड को फिर से अपने बूब्स पर रग़ड़ा। तब मेरा लौड़ा पूरी तरह साफ़ हो गया।अब संगीता ने कहा- अब बस मुझे अपनी बाँहों में लेकर सुला दो.. मुझे प्यार करो.. मुझे कोई मर्द प्यार नहीं करता। तो मैंने उसकी बात का मान रखते हुए नंगे ही रहते हुए उसको अपनी बाँहों में लेकर सो गया।उसके बाद उनको होंठों को चूम कर मैं वहाँ से चला आया। इसके बाद मेरे उनके चुदाई के सम्बंध बन चुके थे और जब वो पूरी तरह से चुदने लायक हो गई तब मैंने उसके साथ बहुत बार चुदाई की।

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