कामिनी भाभी की गुलाबी चुत लाल कर दी

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम हिमांशु में अभी 25 साल का एक सेक्सी हैंडसम लड़का हूँ मेरा कद 5.8 फीट है।मैं सिकंदराबाद में किराए से एक रूम लेकर रहता था.. वहाँ मेरी  कॉलेज की पढ़ाई चल रही थी। में गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने घर उत्तरप्रदेश चला गया था। दोस्तों इस बार जब छुट्टियों के बाद मैं सिकंदराबाद वापिस आया तो मकान मालकिन मीना आंटी ने बताया उन्होंने मेरे साथ वाला बड़ा वाला हिस्सा भी किराए पर दे दिया है। मुझे अच्छा नहीं लगा.. क्योंकि उस हिस्से में मैं और संजना मीना आंटी की बेटी मस्ती किया करते थे.. पर अब क्या कर सकते थे। सोमवार सुबह नए किराएदार का सामान आ गया और एक और हफ्ते में उन्होंने सारी व्यवस्था ठीक कर ली। फिर मेने भी संजना के घर पे पास ही नए रूम को ढून्ढ लिया। जहा मुझे रूम मिला वह  उस घर में एक सेक्सी भाभी और उसका पति दोनों रहते थे.

भाभी के पति का नाम कौशिक था वह एक गवर्नमेंट बैंक में जॉब करता था। कौशिक की पत्नी यानि भाभी एक स्कूल शिक्षक थी। भाभी का नाम कामिनी था वह सुच में काम की देवी थी।  मैं कौशिक को भैया कहने लगा, उसकी अभी दो महीने पहले ही शादी हुई थी। कौशिक भाई सुबह 8 बजे जाता था और रात को 7 बजे वापिस आता था और कामिनी भाभी दोपहर 2 बजे वापिस आ जाती थी। एक दिन की बात है जब में सुबह के समय छत पर कसरत कर रहा था तो कामिनी भाभी अचानक कपड़े सुखाने के लिए छत पर आ गईं। मैं अपनी कसरत करता रहा। मैंने देखा कि कपड़े सुखाते-सुखाते कामिनी भाभी चोर निगाहों से मुझे और मेरी बॉडी को देख रही थीं। कामिनी कपड़े सूखने डाल कर चली गई तो मैंने देखा कि उन कपड़ों में एक सेक्सी लाल रंग की सेक्सी ब्रा और पैन्टी भी थी। कामिनी भाभी के जाने के बाद मैंने वो ब्रा-पैन्टी उठा ली और अपने कमरे में आकर उसे सूंघने लगा।

कामिनी भाभी की चूत की कामुक महक अब भी उस पैन्टी में से आ रही थी। मैंने कामिनी भाभी के नाम की मुठ मारी और सारा माल उस लाल रंग की ब्रा-पैन्टी में छोड़ दिया। फिर कुछ देर बाद मैंने उसे धो कर वापिस छत पर सूखने के लिए डाल दिया। उस दिन मेरी छुट्टी थी.. तो मैं सो गया.. दोपहर को अचानक मेरे दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। Normally: इस वक्त संजना आंटी की बेटी अपनी वासना मिटाने के लिए आती थी तो मैंने बिना सोचे किया ही दरवाजा खोल दिया। सामने देखा तो कामिनी भाभी मेंरे सामने खड़ी थी। मुझे नींद ज्यादा थी और उस वजह से मेरा लंड खड़ा था और इस वजह से कामिनी इधर-उधर देखने लगी। मुझे अचानक मालूम पड़ा तो मैंने तुरंत तौलिया बाँध लिया.. लेकिन लंड अभी भी खड़ा था। मैंने उन्हें नमस्ते की और पूछा- क्या काम है?

कामिनी बोली- मेरे बेड को थोड़ा एक तरफ को सरकाना है.. क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं? ‘हाँ हाँ.. मैं 2 मिनट में आता हूँ…’ 2 मिनट बाद मैं अपनी नाईट शार्ट और टी-शर्ट पहन कर कामिनी के कमरे में चला गया। इस बीच कामिनी भाभी ने भी ड्रेस चेंज कर ली थी और अब कामिनी भाभी एक सफ़ेद लैगीज और लूज़ सी टी-शर्ट में थी। मेरा तो मन किया कि अभी टी-शर्ट के नीचे से हाथ डाल कर चूची मसल दूँ.. लेकिन मैंने संयम कर लिया। बिस्तर की स्थिति को भाभी जी के मुताबिक़ ठीक करते वक्त हम दोनों झुके हुए थे.. उस वजह से कामिनी भाभी के बूब्स दिख रहे थे और मैंने ध्यान दिया तो देखा के जिस लाल ब्रा में मैंने मुठ मारी थी.. वो अब भाभी के गोरे-गोरे बूब्स को सम्भाल रही थी। मेरा लौड़ा फिर से खड़ा होने लगा। कामिनी भाभी भी ये सब देख रही थी और सेक्सी सी मुस्कान दे रही थीं। जब मैं वापिस जाने लगा तो कामिनी भाभी ने ‘थैंक्स’ बोला और कहा- रुकिए न.. चाय पीकर जाना… मैंने कहा- सॉरी भाभी लेकिन मैं चाय नहीं पीता। कामिनी हँसते हुए कहने लगी- तो क्या दूध पियोगे…

मैंने कामिनी भाभी के बूब्स की तरफ देखते हुए कहा- हाँ.. दूध के लिए तो मैं कभी मना नहीं करता… कामिनी थोड़ा शरमाते हुए बोली- ठंडा पियोगे या गरम? मैंने कहा- नार्मल गरम हो तो अच्छा है… हम दोनों समझ गए थे कि आग दोनों तरफ लगी है.. लेकिन खुल नहीं पा रहे थे। कामिनी दूध गर्म करके ले आई थी, दूध पीते हुए भी मेरा ध्यान टीवी से ज्यादा उनके बूब्स पर था। कामिनी भाभी ने बात करनी शुरू की और मेरे शारीरिक सौष्ठव की तारीफ़ करने लगी और मेरे पास आकर बिल्कुल मुझसे सट कर बैठ गई। फिर धीरे से मैंने अपना हाथ भाभी की जाँघों पर रखा तो कामिनी अचानक चुप हो गई और फिर एक हल्की सी ‘आह’ ली.. कामिनी की साँस फूलने लगी। मैं समझ गया कि लोहा गरम है.. मैंने कहा- कामिनी भाभी ये दूध तो मैंने पी लिया.. लेकिन मैं और पीना चाहता हूँ।

कामिनी ने अपनी आँखें बन्द करते हुए कहा- हिमांशु.. जो पीना है पी लो.. सब कुछ तुम्हारा है.. लेकिन ध्यान रखना मुझे भी दूध के बदले में अच्छी मलाई खाना है।  अब सब कुछ साफ़ हो गया था। मैंने कहा- कामिनी जान.. ऐसी मलाई पिलाँऊँगा कि मज़ा आ जाएगा.. अब मैं कामिनी से सेक्सी लिप्स किस्स करने लगा.. कामिनी मदमस्त हो गई और मेरी टी-शर्ट फाड़ने लगी। मैंने कामिनी को रोका और अपनी टी-शर्ट उतार दी। फिर कामिनी ने भी अपनी टी-शर्ट उतारी.. लाल ब्रा में गोरे-गोरे बूब्स.. आह्ह.. कहर ढा रहे थे.. मेरा लंड तो मस्त हुआ जा रहा था। कमीने ने कहा- मेरी की ब्रा में से वीर्य की जो गन्ध आ रही है.. क्या वो तुम्हारी है? तो मैंने ‘हाँ’ में सर हिला दिया। कामिनी ने कहा- डार्लिंग जब मेरी चूत तुम्हारे लिए खुली पड़ी है.. तो मुठ क्यों मारते हो? मैंने कहा- अब मुठ नहीं मारूँगा मेरी जान.. अब तो मेरा लंड सिर्फ़ तेरा है…

यह कहते हुए मैंने अपने अंडरवियर को भी उतार दिया। कामिनी एक पागल औरत की तरह लपकी और मेरा लंड अपने मुँह में भर कर चुसाई करने लगी। ओह.. ये तो संजना से भी अच्छा चूसती है.. मेरा पूरा लंड कामिनी के थूक से गीला हो चुका था। मैंने कामिनी की ब्रा उतार दी.. मेरा लौड़ा चूसते हुए उसके 36 इंच के स्तन आगे-पीछे हो रहे थे.. कामिनी के स्तन इतने मुलायम थे कि उन्हें दबाने भर से ही मेरे लंड की हरकत और तेज़ हो जाती। थोड़ी देर बाद मैंने उसे उठाया और उसी बेड पर लिटा दिया.. कामिनी की सफ़ेद लैगीज उतारी तो देखा कि उसने नीचे कुछ नहीं पहना था। मैंने कामिनी की चूत पर अपना हाथ मला और हैरत में रह गया कि दो महीने हो गए थे कामिनी की शादी को.. लेकिन अभी भी चूत काफ़ी टाइट लग रही थी। मैंने कामिनी की चूत पर अपनी जीभ टिका दी और चूत चटाई शुरू कर दी।

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कुछ देर बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने कामिनी की चूत के कोरेपन के बारे में पूछा तो कामिनी ने कहा- अभी बात मत करो.. बस चाटते रहो। चाटते-चाटते कामिनी की चूत गोरी से लाल हो गई थी। मैंने चाहते हुए भी कहीं कट्टू नहीं किया क्यूंकि इससे कामिनी के पति को पता चल सकता था। अब कामिनी बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी और अपने नाखून मेरी पीठ और चूतड़ों पर गड़ा रही थी। कामिनी काम की मस्ती में एक अजीब से नशे में बोल रही थी- कम ऑन हिमांशु.. आई एम लविंग इट.. कौशिक तो मेरी फ़ुद्दी को चाटते ही नहीं.. और न ही लौड़ा चूसने देते हैं… मैं बहुत प्यासी हूँ… प्लीज़ जीब घुसाओ न.. और थोड़ी अन्दर.. और आह.. आहा.. आह.. और ज़ोर से.. सक्क माई पुसी.. स्क्क मी.. रूको मत और ज़ोर से.. कम ऑन.. इस्स…” और इस लम्बे सीत्कार के साथ ही उसने अपना सारा पानी मेरे मुँह पर छोड़ दिया और निढाल होकर लेट गई।

मैंने कामिनी को उल्टा कर कामिनी के चूतड़ों पर 5-6 चपतें मारीं और कहा- उठ साली रण्डी.. खुद ठंडी हो कर सो गई और जो ये लंड खड़ा किया है.. उसका क्या.. इसकी प्यास कौन मिटाएगा? कामिनी हँसने लगी और बोली- अच्छा जी.. तो अब मैं भाभी से रण्डी हो गई.. खैर कोई बात नहीं रंडीबाज बोल ले.. तूने मुझे वो दिया है जिसके लिए मैं बहुत दिनों से तड़प रही थी। इतने दिनों बाद आज मस्त मजा आया है। तू टेन्शन मत ले.. इस लंड की प्यास मैं ही मिटाऊँगी.. बस एक बार मूत लेने दे… कामिनी मूतने के लिए बाथरूम चली गई। मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था… मैं भी बाथरूम में चला गया और उसे देखने लगा.. जैसे ही कामिनी ने हाथ धोए.. मैंने उसे पकड़ लिया और कामिनी के बूब्स दबाने लगा। अब कामिनी वापिस मूड में आ रही थी और मेरे बालों में हाथ फेरने लगी। फिर अचानक दौड़ कर बेड पर लेट गई।

फिर कामिनी ने अपनी दोनों टाँगें हवा में उठा लीं.. मैंने उसकी गाण्ड के नीचे एक तकिया रखा। कामिनी बोली- अब आजा रंडवे.. तेरी रण्डी की चूत.. तेरे लंड के लिए तरस रही है। मैं कामिनी के मुँह से गालियाँ सुन कर हैरान था। लेकिन मुझे चुदाई करते वक्त गाली देना अच्छा लगता है। मैंने पूछा- डार्लिंग कन्डोम कहाँ है? कामिनी ने कहा जानु- बिस्तर की दराज में मैनफोर्स का फैमिली पैक पड़ा है… ले ले…. कामिनी की टाँगें अब भी हवा में थीं। मैंने अपने लंड पर कन्डोम चढ़ाया और कामिनी की चूतड पर रख दिया। मैं कामिनी के बूब्स दबाने लगा.. और लंड का टोपा कामिनी की चूत से रगड़ खा रहा था। अब कामिनी का शरीर काँप रहा था.. कामिनी ने कहा कुत्ते अब और मत तड़पा अपनी रांड भाभी को… पेल दे.. अब बर्दाश्त नहीं होता… मैंने निशाना लगाया और धक्का दिया.. तो लंड का टोपा अन्दर चला गया।

कामिनी ने चादर को कस कर पकड़ लिया और अपने होंठ कस कर बंद कर लिए। मैं समझ गया कि कामिनी को दर्द हो रहा है.. लेकिन मैंने एक और झटका मारा और सारा का सारा लंड कामिनी की चूत की हर दीवार को तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया। मैं तो मानो जन्नत में था। कामिनी की चूत संजना की चूत की तरह ही कसी हुई थी। कामिनी को दर्द हो रहा था.. लेकिन कामिनी तैयार थी.. मैंने अन्दर-बाहर करना शुरू किया। कुछ देर बाद कामिनी भी साथ देने लगी और ‘आ.. आ..’ करने लगी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। कामिनी अपनी गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी। मैंने कामिनी की गाण्ड से भी खेलना शुरू कर दिया और कामिनी की गाण्ड में ऊँगली डालने लगा.. लेकिन उसकी गांड तो हद से ज़्यादा टाइट थी। मैंने वापिस चूत को ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।

कामिनी बोली- धीरे.. हिमांशु धीरे.. चोद रहा है.. या खोद रहा है.. मैं कोई रियल रंडी नहीं हूँ.. तेरी भाभी हूँ.. आराम से कर.. रात को कौशिक ने भी लेनी है.. मैं तो मर ही जाऊँगी। मैंने कहा- चुप कर साली.. मेरे लिए तो तू रंडी ही है… अब से तू मेरी रंडी है.. जब मेरे मन करेगा.. मैं तुझे रंडी की तरह चोदने आ जाया करूँगा.. वैसे भी संजना से मेरा मन भर रहा है… कामिनी ने कहा- इसका मतलब संजना की भी लेते हो… मैंने उसे डांटते हुए कहा- हाँ.. और ज़्यादा दिमाग़ मत लगा रंडी.. अपनी गाण्ड उठा.. मेरा माल निकलने वाला है.. बोल कहाँ लेगी मेरा वीर्य… कामिनी ने कहा- मलाई तो मेरी है मेरे मुँह में आजा मेरे राजा.. मैं बहुत रफ़्तार से उसे चोद रहा था। कामिनी एक बार और झड़ चुकी थी और उसकी चिकनाई से पूरे कमरे में ‘छाप.. छाप.. छाप..’ की आवाज़ें गूँज रही थीं। मैंने लंड को चूत से बाहर निकाला.. चूत एकदम से फूल गई थी और चूत के होंठ खुले पड़े थे।

मैंने कन्डोम उतारा और कामिनी के मुँह में अपने लण्ड पेलने लगा। कामिनी भी पूरी मस्ती से मेरा लवड़ा चूस रही थी। फिर मेरा शरीर अकड़ने लगा मैंने कामिनी का सर अपने लंड पर खींच लिया और एक जोरदार शॉट के साथ अपनी सारी मलाई कामिनी के मुँह में डाल दी। कामिनी ने एक बूंद भी बाहर नहीं छोड़ा और सारी मलाई पी गई। उसके के बाद भी कामिनी ने तब तक लंड को चाटना बन्द नहीं किया जब तक कि वो वापिस नहीं सो गई। फिर हम दोनों कुछ देर के लिए वहीं सो गए। बाद में मैं अपने कमरे में चला गया.. अब भाभी मेरे लौड़े के लिए नया आइटम बन गई थी। धन्यवाद दोस्तों कहहि पढ़ने के लिए अगर कहानी अछि लगी हो तो इस वेबसाइट को व्हाट्सप्प में फोरवोर्ड कर दे थैंक्स।

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